Premanand Maharaj: क्या सातों जन्मों में एक ही पति मिलता है? प्रेमानंद महाराज ने बताया कर्म और भक्ति का रहस्य

Edited By Updated: 19 Jan, 2026 12:13 PM

premanand maharaj

Premanand Maharaj Teachings on Marriage and Rebirth: सनातन धर्म में पति–पत्नी के रिश्ते को अत्यंत पवित्र माना गया है। अक्सर लोगों के मन में यह प्रश्न उठता है कि क्या यह संबंध केवल एक जन्म तक सीमित होता है या कई जन्मों तक चलता है। इसी गहरे और...

Premanand Maharaj Teachings on Marriage and Rebirth: सनातन धर्म में पति–पत्नी के रिश्ते को अत्यंत पवित्र माना गया है। अक्सर लोगों के मन में यह प्रश्न उठता है कि क्या यह संबंध केवल एक जन्म तक सीमित होता है या कई जन्मों तक चलता है। इसी गहरे और भावनात्मक सवाल का उत्तर वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज ने अपने एक वायरल प्रवचन में आध्यात्मिक गहराई के साथ दिया है।

भक्त का सवाल: क्या सातों जन्मों में एक ही पति मिल सकता है?
एक वायरल वीडियो में एक महिला भक्त प्रेमानंद महाराज से प्रश्न करती हैं कि क्या यह संभव है कि उसे सातों जन्मों में एक ही पति प्राप्त हो। यह सवाल केवल जिज्ञासा नहीं, बल्कि प्रेम, लगाव और आध्यात्मिक आशा से जुड़ा हुआ है।

इस पर प्रेमानंद महाराज बेहद शांत और स्पष्ट शब्दों में उत्तर देते हैं कि सामान्य रूप से ऐसा होना आवश्यक नहीं है, क्योंकि प्रत्येक जन्म में जीव के कर्म, प्रारब्ध और संस्कार बदल जाते हैं।

कर्म और प्रारब्ध से तय होता है जीवनसाथी
प्रेमानंद महाराज बताते हैं कि पति–पत्नी का एक साथ मिलना केवल भावनाओं का विषय नहीं है, बल्कि यह संचित कर्म, प्रारब्ध और आत्मा की यात्रा से जुड़ा होता है। उन्होंने कहा—
हर जन्म में जीव की योनि बदल सकती है।

यह जरूरी नहीं कि अगला जन्म मनुष्य योनि में ही हो।

वर्तमान जीवन का जीवनसाथी अगले जन्म में उसी रूप में मिले, इसकी कोई गारंटी नहीं।

कर्म का विधान अत्यंत सूक्ष्म है, जिसे केवल इच्छा मात्र से बदला नहीं जा सकता।

भगवान की कृपा से असंभव भी हो सकता है संभव।

हालांकि प्रेमानंद महाराज यह भी स्पष्ट करते हैं कि भगवान की कृपा से असंभव कुछ भी नहीं है। यदि कोई स्त्री या पुरुष
भगवान की अनन्य भक्ति करे, पूर्ण समर्पण के साथ प्रभु से प्रार्थना करे, केवल सांसारिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक प्रेम रखे 
तो भगवान चाहें तो ऐसा विधान लिख सकते हैं कि वही जीवनसाथी कई जन्मों तक साथ मिले।

हाथी और राजकुमारी की मार्मिक कथा
अपनी बात को समझाने के लिए प्रेमानंद महाराज एक भावुक कथा सुनाते हैं। उन्होंने बताया एक जन्म में पति-पत्नी का गहरा प्रेम था। पत्नी भक्ति मार्ग पर चली, लेकिन पति आसक्ति में डूबा रहा। मृत्यु के बाद पत्नी भक्ति के प्रभाव से राजकुमारी बनी। पति मोह और आसक्ति के कारण हाथी की योनि में चला गया। बाद में पत्नी की तपस्या और भगवान की कृपा से पति को उस योनि से मुक्ति मिली और दोनों का पुनर्मिलन संभव हो पाया। यह कथा कर्म और भक्ति के अंतर को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।

केवल कर्म नहीं, भक्ति ही निर्णायक है प्रेमानंद महाराज का स्पष्ट संदेश है कि केवल अच्छे कर्म पर्याप्त नहीं, केवल भावनात्मक लगाव भी काफी नहीं भजन, तपस्या और भगवान की अनन्य आराधना ही निर्णायक भूमिका निभाती है। जब जीवन का केंद्र ईश्वर बन जाता है, तभी भगवान अपने नियमों में विशेष कृपा करते हैं।

प्रेमानंद महाराज के अनुसार, सात जन्मों तक एक ही जीवनसाथी मिलना सामान्य नियम नहीं, बल्कि ईश्वर की विशेष कृपा का विषय है। यह तभी संभव है जब भक्ति जीवन का आधार बन जाए। केवल सांसारिक प्रेम नहीं, बल्कि आध्यात्मिक समर्पण ही आत्माओं को जन्म-जन्मांतर तक जोड़ सकता है।

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ

 

 

Related Story

IPL
Royal Challengers Bengaluru

190/9

20.0

Punjab Kings

184/7

20.0

Royal Challengers Bengaluru win by 6 runs

RR 9.50
img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!