Puri Jagannath Mandir news : जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार पर 3D कैमरों की नजर, जानें क्यों पहली बार बुलाई गई RBI की टीम

Edited By Updated: 25 Mar, 2026 10:13 AM

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पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार Ratna Bhandar इन दिनों पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। सदियों से बंद पड़े इस रहस्यमयी खजाने के द्वार 48 साल बाद इन्वेंट्री (गणना) के लिए आज यानी 25 मार्च 2026 से फिर से खोले जा रहे हैं।

Puri Jagannath Mandir news : पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर का रत्न भंडार Ratna Bhandar इन दिनों पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। सदियों से बंद पड़े इस रहस्यमयी खजाने के द्वार 48 साल बाद इन्वेंट्री (गणना) के लिए आज यानी 25 मार्च 2026 से फिर से खोले जा रहे हैं।

48 साल बाद क्यों खुल रहा है रहस्य?
रत्न भंडार की आखिरी बार पूरी इन्वेंट्री 1978 में की गई थी। हालांकि 1985 में इसे एक बार खोला गया था, लेकिन तब केवल बाहरी कक्ष का काम हुआ था। अब 48 साल बाद सरकार और मंदिर प्रशासन आधुनिक तकनीक के साथ इसके एक-एक आभूषण का मिलान पुराने रिकॉर्ड से करने जा रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

पहली बार RBI की टीम क्यों आई?
इस बार की प्रक्रिया पिछली बार से अलग और बहुत प्रोफेशनल है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अधिकारियों को टीम में शामिल करने के पीछे 3 मुख्य कारण हैं।

सटीक माप और शुद्धता: RBI के पास सोने और चांदी की शुद्धता जांचने वाली आधुनिक मशीनें हैं।

अनुभव: इन अधिकारियों को द्वारका (सोमनाथ मंदिर) जैसे बड़े मंदिरों के खजानों की गणना का अनुभव है।

पारदर्शिता: सरकार चाहती है कि खजाने की गिनती में कोई वित्तीय गलती न हो और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन हो।

क्या है खजाने का सच? 
1978 की इन्वेंट्री के अनुसार, रत्न भंडार में भारी मात्रा में कीमती सामान मौजूद है:

सोना: लगभग 128.38 किलोग्राम (इसमें मुकुट, हार, कंगन आदि शामिल हैं)।

चांदी: लगभग 221.53 किलोग्राम (बर्तन और अन्य सजावटी सामान)।

कीमती पत्थर: इसमें अनगिनत हीरे, नीलम, माणिक और मोती जड़े हुए हैं, जिनकी पहचान के लिए इस बार जेमोलॉजिस्ट (रत्न विशेषज्ञ) भी बुलाए गए हैं।

3-लेयर सुरक्षा और आधुनिक तकनीक
मंदिर के खजाने की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने सख्त इंतजाम किए हैं:

3D मैपिंग और डिजिटल कैटलॉग: पहली बार हर गहने की डिजिटल तस्वीर और 3D रिकॉर्ड बनाया जा रहा है ताकि भविष्य के लिए स्थाई दस्तावेज रहे।

SOP (मानक संचालन प्रक्रिया): मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में ताले खोले जाएंगे और हर दिन के काम के बाद चाबियां सरकारी ट्रेजरी में जमा होंगी।

निजी वीडियोग्राफी: पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग होगी ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

भक्तों के लिए जरूरी सूचना
गणना के दौरान मंदिर में भक्तों के दर्शन पूरी तरह बंद नहीं होंगे। श्रद्धालु बाहरी बैरिकेड्स से भगवान के दर्शन कर सकेंगे, लेकिन रत्न भंडार वाले हिस्से (जगममोहन क्षेत्र) में प्रवेश वर्जित रहेगा।

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