Sakat Chauth 2026 : जनवरी में किस दिन रखा जाएगा सकट चौथ व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Edited By Updated: 02 Jan, 2026 04:01 PM

sakat chauth 2026

हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी का विशेष महत्व है, लेकिन माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी, जिसे सकट चौथ, संकष्टी चतुर्थी या तिलकुटा चौथ के नाम से जानते हैं, इसका स्थान सबसे ऊपर माना जाता है।

Sakat Chauth 2026 : हिंदू धर्म में गणेश चतुर्थी का विशेष महत्व है, लेकिन माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी, जिसे सकट चौथ, संकष्टी चतुर्थी या तिलकुटा चौथ के नाम से जानते हैं, इसका स्थान सबसे ऊपर माना जाता है। यह व्रत केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि माताओं के अटूट विश्वास और अपनी संतान के प्रति निस्वार्थ प्रेम का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा करने से जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाएं टल जाती हैं। वर्ष 2026 की शुरुआत में ही यह पावन पर्व आ रहा है, लेकिन इस बार पंचांग की गणना के कारण व्रत की सही तारीख को लेकर श्रद्धालुओं के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। तो आइए जानते हैं सकट चौथ 2026 व्रत के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में-

Sakat Chauth 2026
 
सकट चौथ 2026 शुभ मुहूर्त और चंद्रोदय का समय
वर्ष 2026 में सकट चौथ का पावन पर्व 6 जनवरी, मंगलवार को मनाया जाएगा। चूंकि यह व्रत मंगलवार के दिन पड़ रहा है, इसलिए इसे अंगारकी चतुर्थी का विशेष संयोग भी माना जा रहा है, जो अत्यंत फलदायी होता है। चतुर्थी तिथि की शुरुआत 6 जनवरी 2026 को सुबह 08 बजकर 01 मिनट से होगी और चतुर्थी तिथि का समापन 7 जनवरी 2026 को सुबह 06 बजकर 52 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, सकट चौथ व्रत का व्रत 6 जनवरी 2026 मंगलवार के दिन रखा जाएगा। साथ ही सकट चौथ के दिन चन्द्रोदय समय 08 बजकर 54 मिनट रहेगा। 

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सकट चौथ 2026 पूजा विधि
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र संभव हो तो लाल या पीले धारण करें।
भगवान गणेश के सामने हाथ जोड़कर निर्जला व्रत का संकल्प लें।
एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें। उन्हें सिंदूर, दूर्वा, अक्षत और फूल अर्पित करें।
इस दिन तिल और गुड़ से बने तिलकुटा का भोग लगाना सबसे अनिवार्य माना जाता है। साथ ही मोदक भी अर्पित करें।
दिनभर निराहार रहकर शाम को सकट चौथ की पौराणिक कथा पढ़ें या सुनें।
रात को जब चंद्रमा उदय हो, तब चांदी के पात्र या लोटे में दूध, जल और अक्षत मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। इसके बाद व्रत का पारण करें।

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