Shakambhari Purnima: पौष पूर्णिमा के दिन करें इन Rules को Follow, घर में कभी नहीं होगी अन्न-धन की कमी

Edited By Updated: 03 Jan, 2026 08:17 AM

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Shakambhari Purnima 2026: पौष पूर्णिमा विशेष रूप से माता शाकंभरी जयंती, दान-पुण्य, स्नान और अन्न-सेवा का दिन माना गया है। हिंदू पंचांग, पुराणों और लोकाचार के अनुसार इस दिन किए गए कर्म कई गुना फल देते हैं। नीचे सरल भाषा में बताया गया है कि इस दिन...

Shakambhari Purnima 2026: पौष पूर्णिमा विशेष रूप से माता शाकंभरी जयंती, दान-पुण्य, स्नान और अन्न-सेवा का दिन माना गया है। हिंदू पंचांग, पुराणों और लोकाचार के अनुसार इस दिन किए गए कर्म कई गुना फल देते हैं। नीचे सरल भाषा में बताया गया है कि इस दिन क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए।

Shakambhari Purnima

What should be done on Paush Purnima day पौष पूर्णिमा के दिन क्या करना चाहिए
प्रातः स्नान और शुद्धता
सूर्योदय से पहले स्नान करें।
संभव हो तो गंगा, नदी या तीर्थ जल से स्नान करें, अन्यथा स्नान जल में गंगा जल मिलाएं।
स्वच्छ और हल्के रंग के वस्त्र पहनें।

माता शाकंभरी की पूजा
घर में माता शाकंभरी या दुर्गा माता की पूजा करें।
शाक (हरी सब्जियां), फल, अन्न और जल अर्पित करें।

मंत्र जप करें:
“ॐ शाकंभरी देव्यै नमः” (108 बार)

दान-पुण्य अवश्य करें
शास्त्रों में कहा गया है कि पौष पूर्णिमा का दान अक्षय फल देता है।
अन्न, सब्जी, फल, जल का दान
गरीब, साधु, ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन
गौ-सेवा और पक्षियों को दाना

उपवास या सात्त्विक भोजन
सामर्थ्य अनुसार उपवास रखें या एक समय सात्त्विक भोजन करें।
भोजन में शाकाहार, सादा अन्न और बिना मसाले का भोजन श्रेष्ठ माना गया है।

धर्म और सेवा के कार्य
माता शाकंभरी की कथा सुनें या पढ़ें।
घर-परिवार में शांति और सौहार्द बनाए रखें।
प्रकृति की रक्षा का संकल्प लें (जल, अन्न, पेड़-पौधे का सम्मान)।

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What should not be done on Paush Purnima पौष पूर्णिमा के दिन क्या नहीं करना चाहिए
तामसिक भोजन से बचें

मांस, मदिरा, अंडा, लहसुन-प्याज का सेवन न करें।
अत्यधिक तले-भुने और मसालेदार भोजन से परहेज करें।

झूठ, क्रोध और अपशब्द से दूरी
इस दिन झूठ बोलना, किसी का अपमान करना या क्रोध करना अशुभ माना गया है।
विवाद और कटु वाणी से बचें।

अन्न और जल का अपमान न करें
भोजन का अपव्यय न करें।

जल को व्यर्थ न बहाएं।
शाकंभरी माता अन्न और जल की देवी हैं, इसलिए इनका सम्मान अत्यंत आवश्यक है।

बाल-नाखून न काटें
शास्त्रीय मान्यता के अनुसार पूर्णिमा तिथि पर बाल, दाढ़ी या नाखून काटना वर्जित माना गया है।

आलस्य और निद्रा से बचें
दिन भर सोना या धर्म-कर्म से विमुख रहना शुभ नहीं माना जाता।

धार्मिक मान्यता
पौष पूर्णिमा के दिन जो व्यक्ति अन्न का दान, शाकाहार, सेवा और संयम का पालन करता है, उसके घर में कभी अन्न-धन की कमी नहीं होती और माता शाकंभरी की विशेष कृपा बनी रहती है।

माता शाकंभरी सभी को स्वास्थ्य, समृद्धि और संतुलित जीवन प्रदान करती हैं।

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