माता लक्ष्मी का ये मंदिर बना है ऊँ के आकार का, जानिए इस मंदिर का इतिहास

Edited By Updated: 27 Oct, 2019 10:45 AM

shri ashtalakshmi temple

आज देशभर में दिवाली का त्योहार बड़ी धूम-धाम से मनाया जाएगा। इसके लिए लोग बहुत पहले से ही तैयारियां शुरू कर देते हैं।

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आज देशभर में दिवाली का त्योहार बड़ी धूम-धाम से मनाया जाएगा। इसके लिए लोग बहुत पहले से ही तैयारियां शुरू कर देते हैं। इस दिन शाम के समय माता लक्ष्मी की पूजा का विधान बताया गया है। लोग अपने घरों को तो दीयों से रोशन करते ही हैं, शाम के समय मंदिर में भी जाकर दीप-दान करते हैं। ऐसे में इस दिन लक्ष्मी मंदिर में बहुत ही रौनक देखने को मिलती है। दिवाली के इस खास मौके पर आज हम आपको माता लक्ष्मी के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में शायद ही आप में से किसी न सुना होगा। 
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भारत के चेन्नई के अडयार में स्थित महालक्ष्मी का मंदिर सबसे खास है। इस मंदिर की खास बात ये है कि यहां देवी लक्ष्मी के 8 स्वरूपों की प्रतीमा स्थापित है और इसी कारण इसे 'माता अष्टलक्ष्मी मंदिर' के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि यहां अष्टलक्ष्मी के दर्शन से धन, विद्या, वैभव, शक्ति व सुख की प्राप्ति होती है। मंदिर में देवी लक्ष्मी की 8 प्रतिमाएं भिन्न-भिन्न तल पर स्थापित हैं। भक्तों को माता के- आदि लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, धैर्य लक्ष्मी, गज लक्ष्मी, विद्या लक्ष्मी, विजया लक्ष्मी, संतना लक्ष्मी व धन लक्ष्मी के दर्शन होते हैं। जो लोग यहां आकर माता के दर्शन करते हैं, वे बहुत ही सौभाग्यशाली माने जाते हैं। इस मंदिर के अंत में भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी का प्रतिमा है। यहां आनेवाले श्रद्धालु इस मंदिर के दर्शन किए बिना नहीं वापस नहीं जाते हैं।
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कुछ जानकारों का कहना है कि इस मंदिर का निर्माण 1974 में आरंभ किया गया था। इस मंदिर का निर्माण निवास वरदचेरियार की नेतृत्व में करवाया गया था। 5 अप्रैल 1976 में इस मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना शुरू हुई थी। मंदिर का निर्माण ऊँ के आकार का किया गया है। यह मंदिर तीन मंजिला है और 65 फीट लंबा व 45 फीट चौड़ा है।
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इस, बात से सब वाकिफ है कि देवी लक्ष्मी को कमल का पुष्प अति प्रिय है। यही कारण है कि यहां आने वाले श्रद्धालु माता को कमल का पुष्प जरूर अर्पित करते हैं। यही कारण है कि यहां आने वाले श्रद्धालु भिन्न-भिन्न कमल के पुष्प लेकर आते हैं। माता अष्टलक्ष्मी मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए सुबह 6.30 बजे खुल जाते हैं। इसके बाद दोपहर 12 बजे से लेकर 4 बजे तक बंद रहते हैं। फिर 4 बजे पुन: कपाट भक्तों के दर्शन के लिए खुलते हैं और रात्रि के 9 बजे बंद हो जाते हैं।

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