Edited By Prachi Sharma,Updated: 21 Jan, 2026 04:23 PM

Shubh Samay for manifestation : हिन्दू धर्मशास्त्रों, ज्योतिष और आध्यात्मिक मान्यताओं में समय की शुद्धि को अत्यंत महत्व दिया गया है। कहा जाता है कि समय कभी भी एक समान नहीं रहता, ब्रह्मांड में ऊर्जा का प्रवाह हर क्षण बदलता रहता है।
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Shubh Samay for manifestation : हिन्दू धर्मशास्त्रों, ज्योतिष और आध्यात्मिक मान्यताओं में समय की शुद्धि को अत्यंत महत्व दिया गया है। कहा जाता है कि समय कभी भी एक समान नहीं रहता, ब्रह्मांड में ऊर्जा का प्रवाह हर क्षण बदलता रहता है। हमारे बड़े-बुजुर्ग भी अक्सर कहते हैं कि दिन में एक बार सरस्वती जुबान पर जरूर बैठती हैं। लेकिन क्या वह समय निश्चित है ? शास्त्रों और ऋषि-मुनियों के अनुसार, दिन के कुछ विशेष पवित्र काल होते हैं जब हमारी वाणी और ब्रह्मांड की ऊर्जा के बीच एक गहरा तालमेल स्थापित होता है। आइए जानते हैं उन शुभ समयों के बारे में जब बोलने से या संकल्प लेने से मन की इच्छा पूरी होने की संभावना सबसे अधिक होती है।
ब्रह्म मुहूर्त:
शास्त्रों में ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से लगभग 1 घंटा 36 मिनट पहले) को सबसे श्रेष्ठ माना गया है। आधुनिक गणना के अनुसार, यह समय आमतौर पर सुबह 4:00 बजे से 5:30 बजे के बीच होता है। इस समय वातावरण में सत्व गुण की प्रधानता होती है। शोर कम होता है और ब्रह्मांडीय ऊर्जा अपने चरम पर होती है।
क्यों पूरी होती है इच्छा ? इस समय जागने पर हमारा अवचेतन मन सबसे अधिक सक्रिय होता है। इस काल में जो भी शब्द बोले जाते हैं या जो भी विचार मन में लाए जाते हैं, वे सीधे ब्रह्मांड में प्रसारित होते हैं।
इस समय उठकर सकारात्मक आत्म-चर्चा करें। मैं सफल हूं, "मैं स्वस्थ हूं, जैसे वाक्य इस समय बोलना बीज बोने के समान है।
संध्या काल (गोधूलि बेला)
दिन और रात के मिलन के समय को संध्या काल या प्रदोष काल कहा जाता है। यह समय सूर्यास्त के ठीक पहले और बाद का होता है। कहा जाता है कि इस समय महालक्ष्मी और सरस्वती का भ्रमण होता है। प्राचीन परंपरा के अनुसार, इस समय न तो सोना चाहिए और न ही भोजन करना चाहिए, बल्कि मौन रहकर या शुभ शब्द बोलकर प्रार्थना करनी चाहिए।
वाणी का प्रभाव: इस समय बोले गए शुभ शब्द और की गई प्रार्थनाएं बहुत जल्दी फलीभूत होती हैं क्योंकि यह संधि काल होता है, जहाँ प्रकृति एक अवस्था से दूसरी अवस्था में प्रवेश कर रही होती है।
अभिजीत मुहूर्त: विजय का समय
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, प्रत्येक दिन का सबसे शुभ मुहूर्त अभिजीत मुहूर्त होता है। यह दोपहर के समय (लगभग 11:45 AM से 12:45 PM) होता है। इस मुहूर्त को भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त है। कहा जाता है कि इस समय किए गए कार्य या बोले गए संकल्प कभी विफल नहीं होते। यदि आप किसी महत्वपूर्ण निर्णय की घोषणा कर रहे हैं या किसी से अपनी मनोकामना साझा कर रहे हैं, तो यह समय सर्वश्रेष्ठ है।
सरस्वती का समय (वाणी की शुद्धि)
लोक कथाओं में प्रचलित है कि 24 घंटों में एक बार माता सरस्वती हर व्यक्ति की जिह्वा पर बैठती हैं। हालांकि इसका कोई एक निश्चित समय हर व्यक्ति के लिए तय नहीं है लेकिन विद्वान मानते हैं कि प्रातः काल की पहली घड़ी और ब्रह्म मुहूर्त में इसकी संभावना सर्वाधिक होती है। इसीलिए हमेशा सलाह दी जाती है कि कभी भी खुद को या दूसरों को 'बददुआ' या नकारात्मक शब्द न बोलें, क्योंकि पता नहीं किस घड़ी में सरस्वती आपकी जुबान पर विराजमान हों और वह बात सच हो जाए।
जब चंद्रमा और नक्षत्र अनुकूल हों
कुछ विशेष दिन और समय जैसे पूर्णिमा, अमावस्या, या विनायक चतुर्थी के दिन जब आप शुभ योग में अपनी इच्छा व्यक्त करते हैं, तो उसे 'सिद्ध' माना जाता है।