Spiritual Meaning of Swastik : घर के मुख्य द्वार पर स्वस्तिक क्यों बनाते हैं ? जानें इसके पीछे का आध्यात्मिक रहस्य

Edited By Updated: 23 Feb, 2026 04:27 PM

spiritual meaning of swastik

भारतीय घरों के प्रवेश द्वार पर सिंदूर या कुमकुम से बना स्वस्तिक केवल एक धार्मिक चिह्न नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का सबसे बड़ा पावर हाउस माना जाता है। इसे 'सु-अस्ति' यानी 'शुभ का अस्तित्व' कहा गया है।

Spiritual Meaning of Swastik : भारतीय घरों के प्रवेश द्वार पर सिंदूर या कुमकुम से बना स्वस्तिक केवल एक धार्मिक चिह्न नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का सबसे बड़ा पावर हाउस माना जाता है। इसे 'सु-अस्ति' यानी 'शुभ का अस्तित्व' कहा गया है। जब भी हम किसी नए घर में प्रवेश करते हैं या कोई शुभ कार्य शुरू करते हैं, तो सबसे पहले दरवाजे पर स्वस्तिक उकेरते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि चार रेखाओं से बनी यह साधारण सी दिखने वाली आकृति आखिर घर के मुख्य द्वार के लिए इतनी अनिवार्य क्यों है। प्राचीन शास्त्रों और वास्तु विज्ञान के अनुसार, स्वस्तिक का रहस्य केवल सौभाग्य तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह विज्ञान, अध्यात्म और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का एक अद्भुत संगम है। तो आइए जानते हैं मुख्य द्वार पर स्वस्तिक चिह्न बनाने पीछे के रहस्य के बारे में-

Spiritual Meaning of Swastik

 'सु-अस्ति' का शाब्दिक अर्थ
'स्वस्तिक' शब्द संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है- 'सु' (शुभ) और 'अस्ति' (अस्तित्व)। इसका अर्थ है 'कल्याण का अस्तित्व' या 'जिससे सबका भला हो'। मुख्य द्वार पर इसे बनाने का अर्थ है कि हम ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं कि इस घर के भीतर केवल शुभ और कल्याणकारी ऊर्जा का ही प्रवेश हो।

प्रथम पूज्य गणेश का स्वरूप
अध्यात्म में स्वस्तिक को भगवान श्री गणेश का प्रतीक माना जाता है। स्वस्तिक की दो खड़ी रेखाएं उनकी पत्नियों 'रिद्धि और सिद्धि' को दर्शाती हैं, जबकि किनारे की दो छोटी रेखाएं उनके पुत्रों शुभ और लाभ का प्रतीक हैं। द्वार पर स्वस्तिक बनाने का अर्थ है कि आपने स्वयं विघ्नहर्ता गणेश को अपने घर की सुरक्षा के लिए आमंत्रित किया है।

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नकारात्मक ऊर्जा के लिए फिल्टर का काम
वास्तु विज्ञान के अनुसार, घर का मुख्य द्वार वह स्थान है जहां से बाहरी ऊर्जा भीतर आती है। स्वस्तिक एक पॉजिटिव एनर्जी रिसीवर की तरह काम करता है। यह बाहर से आने वाली नकारात्मक तरंगों को सोख लेता है और केवल सकारात्मक ऊर्जा को ही घर के भीतर प्रवाहित होने देता है।

चार दिशाओं और पुरुषार्थों का प्रतीक
स्वस्तिक की चार भुजाएं चार दिशाओं (पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण) का प्रतिनिधित्व करती हैं। इसके साथ ही, ये जीवन के चार प्रमुख लक्ष्यों जैसे- धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष को भी दर्शाती हैं। इसे द्वार पर लगाने का अर्थ है कि घर के भीतर रहने वाले सदस्य इन चारों क्षेत्रों में संतुलन प्राप्त करेंगे।

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