Edited By Niyati Bhandari,Updated: 15 Aug, 2026 10:48 AM

Rooftop gardening: क्या आप छत पर गार्डन बनाना चाहते हैं? वास्तु शास्त्र के अनुसार पौधों की सही दिशा, वजन का संतुलन और रखरखाव के नियमों को जानकर अपने घर में लाएं सकारात्मकता और खुशहाली।
Rooftop gardening: आजकल के शहरी जीवन में छत पर बागवानी करना एक बेहतरीन शौक और तनाव दूर करने का साधन बन गया है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, छत पर गार्डन बनाया जा सकता है। हालांकि, पौधों का सही चुनाव और उनकी दिशा का निर्धारण करना बेहद आवश्यक है, अन्यथा यह वास्तु दोष का कारण बन सकता है।
छत पर वास्तु का संतुलन बनाए रखने के लिए पौधों को उनकी ऊंचाई और वजन के आधार पर व्यवस्थित करना चाहिए-
दक्षिण और पश्चिम दिशा: वास्तु के अनुसार, दक्षिण और पश्चिम दिशा में बड़े पौधे लगा सकते हैं। यहां आप सीमेंट की क्यारियां भी बना सकते हैं, जिनका फ्लोर लेवल छत के मुख्य लेवल से एक-डेढ़ फिट ऊंचा रखा जा सकता है अथवा यहां बड़े गमले भी रखे जा सकते हैं।

उत्तर और पूर्व दिशा: उत्तर और पूर्व दिशा को हल्का रखना वास्तु में अनिवार्य है। ईशान कोण (उत्तर-पूर्व कोना) को कभी भी भारी न करें। यहां हमेशा छोटे और हल्के गमले ही रखें। यहां सीमेंट की क्यारी नहीं बनाना चाहिए। इस दिशा में तुलसी, कड़ी पत्ता, पुदीना या गुलाब जैसे छोटे पौधे या बेल लगा सकते हैं। यहां बड़े पौधे न लगाएं, क्योंकि इससे ईशान कोण पर अनावश्यक दबाव पड़ता है, जो शुभ नहीं माना जाता।
उत्तर-पश्चिम दिशा (वायव्य कोण) तथा दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण): इस दिशा में आप मध्यम ऊंचाई के पौधे या बेल लगा सकते हैं। ध्यान रहे कि ये बेलें छत की दीवार या फर्श पर अत्यधिक न फैलें, इन्हें समय-समय पर काट-छांट कर नियंत्रित रखना जरूरी है।

वास्तु के साथ-साथ छत के भौतिक रखरखाव पर ध्यान देना भी उतना ही जरूरी है ताकि भविष्य में कोई समस्या न हो। इसके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि छत पर पानी जमा न होने दें। पानी का जमाव न केवल वास्तु दोष पैदा करता है, बल्कि छत की मजबूती के लिए भी हानिकारक है। उत्तर और पूर्व दिशा में छत का फ्लोर लेवल ऊंचा नहीं होना चाहिए, जबकि दक्षिण और पश्चिम दिशा में आप इसे थोड़ा ऊंचा रख सकते हैं, ताकि गमलों में डलने वाला पानी आसानी से बह जाये छत पर रुके नहीं। पानी रुकने से छत में लीकेज की प्राॅब्लम हो सकती है।
गमलों का सही प्लेसमेंटः गमलों को सीधे फर्श पर रखने के बजाय हमेशा स्टैंड का उपयोग करना ज्यादा सही रहता है। स्टैंड का उपयोग करने से हवा का संचार बना रहता है और छत में सीलन आने का खतरा खत्म हो जाता है।

टेरेस गार्डन न केवल आपके घर की शोभा बढ़ाता है, बल्कि इसमें उगाई गई सब्जियां और पौधे मन को अपार आनंद और शांति देते हैं। वास्तु के इन सूक्ष्म नियमों का पालन करके आप अपने टेरेस को समृद्धि, स्वास्थ्य और सकारात्मकता का केंद्र बना सकते हैं।
वास्तु गुरु कुलदीप सलूजा
thenebula2001@gmail.com
