Ujjain Mahakal : महाकालेश्वर मंदिर में बड़ी मालाओं पर प्रतिबंध, भक्तों के लिए नई गाइडलाइन जारी

Edited By Updated: 09 Dec, 2025 08:07 AM

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Ujjain Mahakal: सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित विशेषज्ञ समिति की सिफारिश के बाद अब महाकाल मंदिर में भारी और बड़ी फूल-मालाएं चढ़ाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। लंबे समय से यह देखा जा रहा था कि विशाल मालाओं के कारण गर्भगृह में अव्यवस्था पैदा हो रही थी...

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Ujjain Mahakal: सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित विशेषज्ञ समिति की सिफारिश के बाद अब महाकाल मंदिर में भारी और बड़ी फूल-मालाएं चढ़ाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। लंबे समय से यह देखा जा रहा था कि विशाल मालाओं के कारण गर्भगृह में अव्यवस्था पैदा हो रही थी और भक्तों की आवाजाही भी प्रभावित होती थी। इसी वजह से मंदिर समिति ने व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने और सुरक्षा-स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए यह अहम कदम उठाया है।

मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि भारी मालाओं से गर्भगृह संकुचित हो जाता था, जिससे भीड़ प्रबंधन में कठिनाई आती थी। नई व्यवस्था के अनुसार अब केवल सामान्य आकार की और हल्की फूल-मालाएं ही भगवान महाकाल को अर्पित की जा सकेंगी। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे मंदिर पहुंचते समय इसी नियम का पालन करें और निर्धारित आकार की ही माला लेकर आएं।

ज्योतिर्लिंग की सुरक्षा को लेकर बनी थी विशेषज्ञ टीम
वर्ष 2017 में ज्योतिर्लिंग के क्षरण को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने ए.एस.आई और जी.एस.आई के विशेषज्ञों की एक टीम बनाई थी। इस टीम ने 2019 से विस्तृत जांच शुरू की और ज्योतिर्लिंग की सुरक्षा के लिए कई सुझाव दिए। इन्हीं सुझावों में छोटी माला और सीमित मात्रा में फूल चढ़ाने की बात भी शामिल थी।

10 से 15 किलो तक बिक रही थीं भारी माला
पिछले कुछ समय से यह देखा गया था कि मंदिर के आसपास की दुकानों पर 10 से 15 किलो वजन वाली मोटी मालाएं बिक रहीं थीं। 500 से 2100 रुपये तक की इन मालाओं को कई भक्त खरीदकर गर्भगृह तक ले जाते थे और भगवान को पहनाया भी जाता था। विशेषज्ञों की चेतावनी के बावजूद यह प्रथा जारी थी।

प्रवेश द्वार पर होगी सख्त जांच
नया नियम लागू होने के बाद अब मंदिर के हर प्रवेश द्वार पर सुरक्षा कर्मी भक्तों द्वारा लाई जा रही पूजा सामग्री की जांच करेंगे। यदि कोई बड़ी या भारी माला लेकर आता है तो उसे गेट पर ही जमा करवा दिया जाएगा। किसी भी हालत में ऐसी मालाएं गर्भगृह या मंदिर परिसर के भीतर नहीं ले जाई जा सकेंगी।


 

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