Edited By Prachi Sharma,Updated: 24 Jan, 2026 10:55 AM

Ujjain Mahakal Lok : विश्वप्रसिद्ध बाबा महाकाल के दर्शन के लिए प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु और सैलानी उज्जैन पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति के साथ एक भव्य और सौंदर्यपूर्ण वातावरण देने के उद्देश्य से महाकाल महालोक का विकास किया गया। इस...
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Ujjain Mahakal Lok : विश्वप्रसिद्ध बाबा महाकाल के दर्शन के लिए प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु और सैलानी उज्जैन पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति के साथ एक भव्य और सौंदर्यपूर्ण वातावरण देने के उद्देश्य से महाकाल महालोक का विकास किया गया। इस परिसर में स्थापित सप्त ऋषियों की प्रतिमाएं शुरू से ही लोगों के आकर्षण का केंद्र रही हैं हालांकि कुछ समय पहले ये प्रतिमाएं क्षतिग्रस्त हो गई थीं। अब इन्हें नए और भव्य स्वरूप में दोबारा स्थापित करने की तैयारियां अंतिम दौर में हैं।
मई 2023 में आए तेज आंधी-तूफान के दौरान फाइबर से निर्मित सप्त ऋषियों की मूर्तियां टूट गई थीं, जिससे निर्माण सामग्री की मजबूती पर सवाल खड़े हुए। इसके बाद सरकार ने फैसला लिया कि महाकाल महालोक में आगे केवल पत्थर से बनी मजबूत और दीर्घकालिक मूर्तियां ही स्थापित की जाएंगी। इसी निर्णय के तहत नई पाषाण प्रतिमाओं का निर्माण कार्य तेज़ी से कराया जा रहा है।
इन मूर्तियों को ओडिशा के कोणार्क से आए अनुभवी शिल्पकार तराश रहे हैं, जिनका परिवार पीढ़ियों से मूर्तिकला से जुड़ा रहा है। ये कारीगर देश के कई ऐतिहासिक स्थलों, जिनमें कोणार्क का सूर्य मंदिर भी शामिल है, पर अपनी कला का योगदान दे चुके हैं।
इस परियोजना की अगुवाई प्रसिद्ध शिल्पकार ईश्वर चंद्र महाराणा कर रहे हैं, जिन्हें हाल ही में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उनके निर्देशन में लगभग 30 कारीगर लगातार कार्य कर रहे हैं। सभी मूर्तियां राजस्थान के बंशी पहाड़पुर से मंगाए गए विशेष पत्थर से बनाई जा रही हैं, जो अपनी मजबूती और टिकाऊपन के लिए जाना जाता है। प्रत्येक मूर्ति की ऊंचाई करीब 15 फीट रखी गई है, साथ ही एक विशाल शिव प्रतिमा का निर्माण भी किया जा रहा है। अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है और अब अंतिम सजावटी चरण चल रहा है।
त्रिवेणी संग्रहालय के प्रबंधक गौरव तिवारी ने बताया कि फरवरी 2026 के पहले सप्ताह तक सभी मूर्तियां पूरी तरह तैयार होकर महाकाल महालोक में स्थापित कर दी जाएंगी। बीते दो वर्षों से उज्जैन के हाट बाजार क्षेत्र में यह कार्य निरंतर जारी है, जहां ओडिशा से आए करीब 15 कारीगर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 अक्टूबर 2022 को महाकाल लोक का लोकार्पण किया था। आज यह स्थल न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि देशभर के पर्यटकों के लिए भी एक प्रमुख आकर्षण बन चुका है। पत्थर से निर्मित सप्त ऋषियों की ये नई भव्य प्रतिमाएं महाकाल महालोक की गरिमा और भव्यता को और अधिक बढ़ाने वाली साबित होंगी।