Ujjain Mahakal Mandir : 4 मार्च से बाबा महाकाल की दिनचर्या में होगा बदलाव, जानें भोग और संध्या आरती का नया समय

Edited By Updated: 19 Feb, 2026 10:37 AM

ujjain mahakal mandir

Ujjain Mahakal Mandir :  उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से भगवान महाकाल की दिनचर्या में बदलाव किया जाएगा। 4 मार्च से गर्मी की परंपरागत व्यवस्था लागू होगी, जिसके तहत अवंतिकानाथ को अब ठंडे जल से...

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Ujjain Mahakal Mandir :  उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से भगवान महाकाल की दिनचर्या में बदलाव किया जाएगा। 4 मार्च से गर्मी की परंपरागत व्यवस्था लागू होगी, जिसके तहत अवंतिकानाथ को अब ठंडे जल से स्नान कराया जाएगा। मंदिर में प्रतिदिन होने वाली पांच आरतियों में से तीन के समय में परिवर्तन किया जाएगा। यह ग्रीष्मकालीन क्रम शरद पूर्णिमा तक जारी रहेगा।

मंदिर की परंपरा के अनुसार वर्ष में दो बार भगवान महाकाल की दिनचर्या और आरती के समय में बदलाव किया जाता है। कार्तिक कृष्ण प्रतिपदा से फाल्गुन पूर्णिमा तक शीतकालीन व्यवस्था लागू रहती है, जिसमें भगवान का अभिषेक गर्म जल से किया जाता है। वर्तमान में पूजा-पद्धति सर्दी के अनुसार चल रही है, लेकिन होली के अगले दिन से ग्रीष्मकालीन व्यवस्था प्रभावी हो जाएगी।

कार्तिक प्रतिपदा से होली तक आरती का समय
भस्म आरती : तड़के 4 बजे से सुबह 6 बजे तक
बालभोग आरती : सुबह 7.30 बजे से 8.15 बजे
भोग आरती : सुबह 10.30 से 11.15 बजे तक
संध्या पूजा : शाम 5 बजे
संध्या आरती : शाम 6.30 से शाम 7.15 बजे तक
शयन आरती : रात 10.30 से रात 11 बजे तक

चैत्र प्रतिपदा से शरद पूर्णिमा तक आरती का समय
भस्म आरती : तड़के 4 से सुबह 6 बजे तक
बालभोग आरती : सुबह 7 से 7.45 बजे तक
भोग आरती : सुबह 10 से 10.45 बजे तक
संध्या पूजा : शाम 5 बजे
संध्या आरती : शाम 7 से 7.45 बजे तक
शयन आरती : रात 10.30 से 11 बजे तक

महाशिवरात्रि पर रिकॉर्ड प्रसाद बिक्री
इस वर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। दो दिनों में आठ लाख से अधिक भक्तों ने दर्शन किए। मंदिर प्रशासन के अनुसार इस दौरान लड्डू प्रसाद की बिक्री ने नया रिकॉर्ड बनाया। कुल 1 करोड़ 95 लाख 82 हजार 200 रुपये का लड्डू प्रसाद भक्तों ने खरीदा। देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालु दर्शन के साथ-साथ महाकाल का प्रसाद भी अपने साथ ले गए। इस प्रकार, महाकाल मंदिर में परंपराओं के अनुसार भगवान की दिनचर्या में बदलाव के साथ ही महाशिवरात्रि का पर्व भव्य और ऐतिहासिक रहा।

 

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