Edited By Mansa Devi,Updated: 02 Mar, 2026 01:40 PM

ई-कॉमर्स कंपनी Amazon India ने अपने सेलर्स और ग्राहकों के लिए अहम बदलावों की घोषणा की है। कंपनी के नए फैसले के तहत 300 रुपये से कम कीमत वाले प्रोडक्ट्स पर शिपिंग शुल्क में 20 प्रतिशत तक की कटौती की जाएगी।
नेशनल डेस्क: ई-कॉमर्स कंपनी Amazon India ने अपने सेलर्स और ग्राहकों के लिए अहम बदलावों की घोषणा की है। कंपनी के नए फैसले के तहत 300 रुपये से कम कीमत वाले प्रोडक्ट्स पर शिपिंग शुल्क में 20 प्रतिशत तक की कटौती की जाएगी। इससे छोटे विक्रेताओं की लागत घटेगी और ग्राहकों को भी कम कीमत पर सामान मिलने की उम्मीद है।
1,800 कैटेगरी में जीरो रेफरल फीस
कंपनी ने 16 मार्च से 300 से 1,000 रुपये की कीमत वाले प्रोडक्ट्स के लिए अपनी जीरो रेफरल फीस नीति का दायरा बढ़ा दिया है। अब यह सुविधा 1,800 से अधिक प्रोडक्ट कैटेगरी में लागू होगी। इससे पहले 300 रुपये से कम कीमत वाले उत्पादों पर रेफरल फीस समाप्त की जा चुकी थी। अब इस लाभ को और अधिक श्रेणियों तक पहुंचाया जा रहा है।
क्या होती है रेफरल फीस?
रेफरल फीस वह कमीशन है जो कंपनी अपने प्लेटफॉर्म पर बिकने वाले हर प्रोडक्ट पर विक्रेता से लेती है। आमतौर पर यह शुल्क उत्पाद की कीमत का लगभग 2% से 16.5% तक होता है। इस फीस में राहत मिलने से खासकर छोटे और मध्यम कारोबारियों को सीधा फायदा होगा।
ईजी शिप फीस में भी राहत
नए बदलाव के तहत 300 रुपये से कम कीमत वाले उत्पादों पर ‘ईजी शिप’ सेवा शुल्क में भी 20 प्रतिशत की कमी की गई है। ईजी शिप मॉडल में विक्रेता अपने गोदाम या दुकान में सामान रखते हैं, जबकि कंपनी पिकअप और डिलीवरी की जिम्मेदारी संभालती है। यह व्यवस्था नए और छोटे सेलर्स के लिए काफी सुविधाजनक मानी जाती है।
प्रतिस्पर्धा में अन्य कंपनियों के कदम
ई-कॉमर्स सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच अन्य कंपनियों ने भी इसी तरह के कदम उठाए हैं। पिछले साल नवंबर में Flipkart ने 1,000 रुपये से कम कीमत वाले प्रोडक्ट्स के लिए जीरो कमीशन मॉडल शुरू किया था। बाद में इसे अपने हाइपर-वैल्यू प्लेटफॉर्म Shopsy पर सभी प्रोडक्ट्स के लिए लागू कर दिया गया।
इससे पहले 2022 में Meesho ने सबसे पहले जीरो कमीशन मॉडल पेश किया था। कंपनी का फोकस छोटे और मध्यम कारोबारियों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ना रहा है। मीशो खास तौर पर टियर-2 और छोटे शहरों के ग्राहकों को ध्यान में रखकर काम करता है।
सेलर्स और ग्राहकों को क्या फायदा?
विशेषज्ञों का मानना है कि इन फैसलों से ऑनलाइन बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज होगी। कम फीस के कारण विक्रेता ज्यादा प्रोडक्ट लिस्ट कर सकेंगे और ग्राहकों को कम कीमत पर विकल्प मिलेंगे। आने वाले समय में ई-कॉमर्स कंपनियों के बीच ऐसे और भी ग्राहक-केंद्रित फैसले देखने को मिल सकते हैं।