Edited By Ashutosh Chaubey,Updated: 16 May, 2025 05:37 PM

दुनिया के नक्शे पर तुर्की एक ऐसा देश है, जो दो महाद्वीपों – एशिया और यूरोप – को आपस में जोड़ता है। लेकिन एक समय ऐसा भी था, जब इस देश को ‘यूरोप का मरीज’ यानी Sick Man of Europe कहा जाता था।
नेशलन डेस्क: दुनिया के नक्शे पर तुर्की एक ऐसा देश है, जो दो महाद्वीपों – एशिया और यूरोप – को आपस में जोड़ता है। लेकिन एक समय ऐसा भी था, जब इस देश को ‘यूरोप का मरीज’ यानी Sick Man of Europe कहा जाता था। ऐसा इसलिए क्योंकि तुर्की में एक दौर में राजनीतिक अस्थिरता, सुल्तानों की विलासी जीवनशैली और प्रजा पर अत्याचार इतना बढ़ गया था कि पूरा साम्राज्य धीरे-धीरे टूटने लगा था। ये दौर 18वीं और 19वीं सदी का था, जब कभी शक्तिशाली रहा उस्मानी (ऑटोमन) साम्राज्य अपने अंत की ओर बढ़ रहा था।
भारत-पाक तनाव में तुर्की ने किसका साथ दिया?
हाल के वर्षों में जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ा, तो तुर्की ने खुलकर पाकिस्तान का समर्थन किया। इससे भारत में लोगों की नाराजगी बढ़ गई और सोशल मीडिया पर #BoycottTurkey ट्रेंड करने लगा। कई लोगों ने तुर्की के प्रोडक्ट्स और टूरिज्म का बहिष्कार करने की बात कही। यह पहला मौका नहीं था जब तुर्की ने पाकिस्तान का साथ दिया हो, इससे पहले भी वह कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के पक्ष में बयान देता रहा है।
चाय की दीवानी तुर्की की जनता
हालांकि भारत में चाय को सबसे ज़्यादा पसंद किया जाता है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि तुर्की की लगभग 96 फीसदी आबादी हर दिन चाय पीती है। यहां चाय केवल एक पेय नहीं, बल्कि सामाजिक जुड़ाव का ज़रिया है। दुकानों, दफ्तरों, यहां तक कि सरकारी बैठकों में भी चाय सर्व की जाती है। एक औसत तुर्क व्यक्ति दिन में 5 से 10 कप चाय आराम से पी जाता है।
कॉफी को लेकर तलाक तक पहुंची बात!
आज भले ही तुर्की को चाय पसंद हो, लेकिन 16वीं सदी में यही देश कॉफी को अपने साथ लेकर आया था। तुर्की की संस्कृति में कॉफी इतनी महत्वपूर्ण थी कि अगर कोई पति अपनी पत्नी को कॉफी लाकर नहीं देता था, तो पत्नी उसे तलाक देने का हक रखती थी। यह सुनने में जरूर अजीब लगता है लेकिन इतिहास में ऐसा वाकई होता था। उस समय महिलाओं के लिए कॉफी का न मिलना एक गंभीर घरेलू समस्या मानी जाती थी।
तुर्की का ऐतिहासिक सफर
तुर्की का इतिहास बेहद पुराना और रंगीन है। यह इलाका कभी फारसी साम्राज्य (530 ईसा पूर्व), फिर यूनानी, और फिर सिकंदर महान के यूनानी साम्राज्य का हिस्सा रहा। इसके बाद यहां इस्लाम आया और तुर्की में औगुज, सल्जूक और उस्मानी जातियों ने सुन्नी इस्लाम को अपनाया।
16वीं सदी में उस्मानी साम्राज्य (Ottoman Empire) ने तुर्की को एक ताकतवर इस्लामी सत्ता बना दिया। लेकिन 18वीं सदी आते-आते यह साम्राज्य ढलान पर आ गया। राजाओं की ऐशो-आराम की जिंदगी, कुप्रबंधन और यूरोपीय ताकतों के दवाब की वजह से यह साम्राज्य बीमार हो गया और तभी इसे ‘Sick Man of Europe’ कहा जाने लगा।
दो महाद्वीपों का सेतु है तुर्की
तुर्की दुनिया के उन गिने-चुने देशों में से है, जिसका भूगोल दो महाद्वीपों को जोड़ता है। इसका एक भाग यूरोप में और अधिकांश हिस्सा एशिया में आता है। इस कारण इसे यूरेशिया का सेतु कहा जाता है। इसकी राजधानी अंकारा है लेकिन सबसे प्रसिद्ध शहर इस्तांबुल है, जो एशिया और यूरोप को जोड़ने वाले पुल के रूप में जाना जाता है।