बांग्लादेश फिर कटघरे में: अब पुलिस  हिरासत में BNP हिंदू नेता की मौत, मचा बवाल

Edited By Updated: 14 Jan, 2026 02:38 PM

hindu leader of sheikh hasina s party dies in police custody in bangladesh

बांग्लादेश में शेख हसीना की अवामी लीग के हिंदू नेता प्रलय चकी की पुलिस हिरासत में मौत हो गई। परिवार ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है, जबकि जेल प्रशासन ने सभी आरोप खारिज किए। घटना ने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

International Desk: बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग से जुड़े एक हिंदू नेता की पुलिस हिरासत में मौत हो गई है, जिससे देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। मृतक की पहचान 60 वर्षीय प्रलय चकी के रूप में हुई है, जो अवामी लीग की पाबना जिला इकाई में सांस्कृतिक मामलों के सचिव थे और एक प्रसिद्ध गायक भी थे। बांग्लादेशी अख़बार द डेली स्टार के अनुसार, प्रलय चकी की मौत रविवार रात राजशाही मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हुई, जहां उन्हें जेल हिरासत में रहते हुए भर्ती कराया गया था। चकी को 2024 के ‘भेदभाव विरोधी छात्र आंदोलन’ से जुड़े एक विस्फोट मामले में गिरफ्तार किया गया था, जो आगे चलकर ‘जुलाई विद्रोह’ में तब्दील हुआ और शेख हसीना की सत्ता से विदाई का कारण बना।

पाबना जेल अधीक्षक मोहम्मद ओमर फारूक ने बताया कि चकी लंबे समय से मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग से पीड़ित थे। उन्होंने कहा कि पहले उन्हें पाबना सदर अस्पताल भेजा गया, जहां से हालत गंभीर होने पर शुक्रवार रात राजशाही मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया। इलाज के दौरान ही रविवार रात उनकी मौत हो गई। हालांकि, प्रलय चकी के परिवार ने जेल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके बेटे सोनी चकी का कहना है कि उनके पिता को बिना नामजद किए गिरफ्तार किया गया और बाद में एक विस्फोट मामले में फंसाया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जेल में उनके पिता की तबीयत लगातार बिगड़ती रही, लेकिन परिवार को समय पर सूचना नहीं दी गई और न ही उचित इलाज मिला।

 

पाबना सम्मिलित सांस्कृतिक जोत के सचिव भास्कर चौधरी ने भी चकी की मौत पर सवाल उठाते हुए कहा कि वह सिर्फ एक राजनेता नहीं, बल्कि 1990 के दशक के एक प्रमुख सांस्कृतिक कार्यकर्ता, गायक और संगीत निर्देशक थे। उन्होंने इस तरह की मौत को अस्वीकार्य बताया। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब अंतरिम प्रमुख मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ हिंसा, भीड़ हमलों और गुप्त हमलों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे देश की कानून-व्यवस्था और मानवाधिकार स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ती जा रही है।

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