Edited By Tanuja,Updated: 14 Jan, 2026 05:35 PM

ईरान में जारी भीषण विरोध प्रदर्शनों और हिंसक दमन के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई गई। इज़राइल, यूरोपीय संघ, फिनलैंड और डेनमार्क ने ईरानी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में कड़े बयान दिए। संभावित फांसी और अतिरिक्त प्रतिबंधों को लेकर...
International Desk: ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हिंसक दमन और हत्याओं के आरोपों के बीच संयुक्त राष्ट्र ने सुरक्षा परिषद की आपात बहस बुलाने का फैसला किया है। संयुक्त राष्ट्र में इज़राइल के राजदूत डैनी डैनन ने इस कदम का स्वागत करते हुए ईरानी प्रदर्शनकारियों के समर्थन में कड़ा बयान दिया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर कहा कि जब अयातुल्ला शासन प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चला रहा है और विरोधियों को फांसी दे रहा है, तब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की धीमी प्रतिक्रिया चिंताजनक है। डैनन ने कहा “ईरानी जनता, आप अकेले नहीं हैं। आज़ादी की आपकी लड़ाई किसी भी दमनकारी शासन से ज़्यादा मजबूत है।”
यूरोप में प्रतिक्रिया और तेज
इस बीच, यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कलास ने भी ईरानी जनता के साहस की सराहना की और सुरक्षा बलों की कार्रवाई को अस्वीकार्य बताया। उन्होंने संकेत दिए कि ईरान पर अतिरिक्त प्रतिबंधों पर चर्चा चल रही है। फिनलैंड ने ईरान के चार्ज द’अफेयर्स को तलब कर हिंसा रोकने, हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों की रिहाई और इंटरनेट व सूचना तक पहुंच सुनिश्चित करने की मांग की।
वहीं डेनमार्क के विदेश मंत्री लार्स लोके रासमुसेन ने कहा कि प्रदर्शनकारियों पर brutal कार्रवाई अस्वीकार्य है और जरूरत पड़ी तो और कड़े कदम उठाए जाएंगे। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, ईरान में 28 दिसंबर 2025 से विरोध प्रदर्शन जारी हैं। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सरकार पहली बार किसी प्रदर्शनकारी को फांसी देने की तैयारी कर रही है, जबकि हजारों लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है।