Edited By Parveen Kumar,Updated: 14 Jan, 2026 06:20 PM

ईरान में मौजूदा जन-आंदोलन को 2009 और 2022 के बाद का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन माना जा रहा है। धार्मिक सत्ता के खिलाफ लाखों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। कई शहरों में सुरक्षा बलों की सख्ती, झड़पें और तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं। हालात की गंभीरता को देखते...
नेशनल डेस्क: ईरान में मौजूदा जन-आंदोलन को 2009 और 2022 के बाद का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन माना जा रहा है। धार्मिक सत्ता के खिलाफ लाखों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। कई शहरों में सुरक्षा बलों की सख्ती, झड़पें और तनावपूर्ण हालात बने हुए हैं। हालात की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने देशभर में इंटरनेट ब्लैकआउट लागू कर दिया है, जिससे विदेशी नागरिकों का अपने परिवारों और दूतावासों से संपर्क भी मुश्किल हो गया है।
ऐसे हालात में भारत सरकार ने ईरान में मौजूद अपने नागरिकों के लिए एक अहम एडवायजरी जारी की है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि ईरान में कितने भारतीय फंसे हैं, उन्हें सुरक्षित निकालना कितना चुनौतीपूर्ण होगा और अगर निकासी करनी पड़ी तो सरकार को कितना खर्च उठाना पड़ सकता है।
भारत सरकार की ताजा एडवायजरी क्या कहती है
भारत सरकार ने 5 जनवरी 2025 को जारी अपनी एडवायजरी को आगे बढ़ाते हुए भारतीय नागरिकों को जल्द से जल्द ईरान छोड़ने की सलाह दी है। सरकार ने कहा है कि लोग उपलब्ध साधनों, खासकर वाणिज्यिक उड़ानों के जरिए देश से बाहर निकलने की कोशिश करें।
इसके साथ ही प्रदर्शन स्थलों से दूर रहने, पूरी सतर्कता बरतने और लगातार भारतीय दूतावास के संपर्क में रहने को कहा गया है। एडवायजरी में यह भी साफ किया गया है कि सभी भारतीय अपने पासपोर्ट और पहचान पत्र हमेशा तैयार रखें।

ईरान में कितने भारतीय मौजूद हैं
सरकारी और दूतावास से जुड़े आकलनों के मुताबिक ईरान में इस समय करीब 10 से 12 हजार भारतीय नागरिक रह रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या छात्रों की है, खासतौर पर मेडिकल और धार्मिक अध्ययन से जुड़े विद्यार्थी। इसके अलावा छोटे कारोबारी, तकनीकी पेशेवर और कुछ पर्यटक भी ईरान में मौजूद हैं। संकट की स्थिति में इतने विविध समूह की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है।
निकासी ऑपरेशन क्यों होगा जटिल
ईरान से भारतीयों को सुरक्षित निकालना आसान नहीं माना जा रहा है। इंटरनेट ब्लैकआउट के कारण सूचनाओं का प्रवाह बाधित है, कई इलाकों में आवाजाही पर पाबंदियां हैं और उड़ानों की उपलब्धता भी सीमित हो सकती है। ऐसे में भारत सरकार को चार्टर्ड फ्लाइट्स, विशेष कूटनीतिक अनुमतियों और वैकल्पिक मार्गों पर विचार करना पड़ सकता है। जरूरत पड़ने पर पड़ोसी देशों के हवाई अड्डों के जरिए निकासी भी एक विकल्प हो सकता है।

सरकार पर कितना आर्थिक बोझ पड़ सकता है
अगर बड़ी संख्या में भारतीयों को विशेष उड़ानों से निकालना पड़ा, तो प्रति व्यक्ति खर्च करीब 60 हजार से लेकर 1 लाख रुपये तक हो सकता है। इसमें विमान चार्टर, सुरक्षा व्यवस्था, लॉजिस्टिक्स और आपात सहायता का खर्च शामिल होता है। इस हिसाब से कुल खर्च कई सौ करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। हालांकि सरकार आमतौर पर पहले वाणिज्यिक उड़ानों को प्राथमिकता देती है, ताकि सरकारी खजाने पर बोझ कम से कम पड़े।
पहले भी कर चुका है भारत ऐसे बड़े रेस्क्यू
यह पहली बार नहीं है जब भारत को अपने नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाना पड़ा हो। यूक्रेन संकट के दौरान ऑपरेशन गंगा और अफगानिस्तान से निकासी जैसे अभियानों में भारत पहले ही अपनी क्षमता दिखा चुका है। इन अनुभवों के चलते सरकार के पास अब योजनाएं, संसाधन और रणनीति पहले से मौजूद हैं, जिससे जरूरत पड़ने पर ईरान से भी भारतीयों को सुरक्षित निकालने की तैयारी की जा सकती है।