इजराइल-ईरान युद्ध के बीच AI से बनाए नकली मिसाइल वीडियो पर UAE सख्त, 19 भारतीयों सहित 35 लोग गिरफ्तार

Edited By Updated: 15 Mar, 2026 10:16 PM

35 people including 19 indians arrested in uae for posting misleading content

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने रविवार को सोशल मीडिया पर भ्रामक और फर्जी वीडियो क्लिप साझा करने के आरोप में 35 लोगों की गिरफ्तारी के आदेश जारी किए हैं।

इंटरनेशनल डेस्कः संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने रविवार को सोशल मीडिया पर भ्रामक और फर्जी वीडियो क्लिप साझा करने के आरोप में 35 लोगों की गिरफ्तारी के आदेश जारी किए हैं। इनमें 19 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। यह कार्रवाई ऐसे समय में की गई है जब इज़राइल, अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध के कारण पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ है और सोशल मीडिया पर गलत जानकारी तेजी से फैल रही है। यूएई की आधिकारिक समाचार एजेंसी WAM के अनुसार सभी आरोपियों को त्वरित (फास्ट-ट्रैक) सुनवाई के लिए अदालत में पेश किया जाएगा।

अलग-अलग सूचियों में नाम, कुल 35 लोग आरोपी

रिपोर्ट के मुताबिक शनिवार को पहले 10 लोगों की गिरफ्तारी के आदेश दिए गए थे, जिनमें 2 भारतीय शामिल थे। इसके बाद रविवार को जारी नई सूची में 25 और लोगों के नाम जोड़े गए, जिनमें 17 भारतीय हैं। इस तरह कुल मिलाकर 35 लोगों को इस मामले में आरोपी बनाया गया है।

तीन अलग-अलग समूहों में बांटे गए आरोपी

यूएई के अटॉर्नी जनरल डॉ. हमद सैफ अल शम्सी ने बताया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म की कड़ी निगरानी के दौरान इन लोगों की गतिविधियां सामने आईं। जांच में पाया गया कि आरोपी तीन अलग-अलग समूहों में काम कर रहे थे और उन्होंने अलग-अलग तरह की भ्रामक सामग्री पोस्ट की।

इन गतिविधियों में शामिल थे:

  • मौजूदा घटनाओं से जुड़े असली वीडियो को भ्रामक तरीके से पेश करना

  • AI की मदद से नकली वीडियो बनाना

  • एक ऐसे देश की सैन्य कार्रवाइयों की प्रशंसा करना जो क्षेत्र में आक्रामकता दिखा रहा है

पहला समूह: असली वीडियो को भ्रामक तरीके से फैलाया

पहले समूह के 10 लोगों ने मिसाइलों के गुजरने या उन्हें इंटरसेप्ट किए जाने से जुड़े असली वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए। उन्होंने इन वीडियो के साथ ऐसे कमेंट और साउंड इफेक्ट जोड़े जिससे ऐसा लगे कि देश में सक्रिय हमले हो रहे हैं। इससे लोगों में डर और घबराहट फैलने की आशंका थी।

इस समूह में 5 भारतीय,1 पाकिस्तानी,1 नेपाली,2 फिलीपीन नागरिक और मिस्री नागरिक शामिल हैं।

सरकार का कहना है कि ऐसे वीडियो देश की रक्षा क्षमताओं के बारे में जानकारी उजागर कर सकते हैं और दुश्मन ताकतों को गलत प्रचार करने का मौका दे सकते हैं।

दूसरा समूह: AI से बनाए नकली विस्फोट और मिसाइल वीडियो

दूसरे समूह के 7 लोगों पर आरोप है कि उन्होंने AI तकनीक से बनाए गए फर्जी वीडियो पोस्ट किए। इन वीडियो में नकली विस्फोट, मिसाइल हमले और धुएं के दृश्य दिखाए गए थे। कई क्लिप में राष्ट्रीय झंडे और तारीखें भी जोड़ी गई थीं ताकि वीडियो असली लगे और लोगों को गुमराह किया जा सके।

इस समूह में 5 भारतीय,1 नेपाली और 1 बांग्लादेशी शामिल हैं।

 

तीसरा समूह: एक दुश्मन देश की सैन्य कार्रवाइयों का प्रचार

तीसरे समूह के 6 लोगों पर आरोप है कि उन्होंने एक शत्रु देश की सैन्य कार्रवाइयों की प्रशंसा करते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट किए। इन पोस्ट में उस देश के राजनीतिक और सैन्य नेताओं की तारीफ की गई और क्षेत्रीय सैन्य हमलों को उपलब्धि के रूप में पेश किया गया।

इस समूह में 5 भारतीय और 1 पाकिस्तानी शामिल हैं।

दो और भारतीयों पर भी केस

इसके अलावा दो अन्य भारतीय नागरिकों पर भी इसी तरह के अपराधों के आरोप लगाए गए हैं। शनिवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, अभियोजन पक्ष ने पहले गिरफ्तार किए गए 10 आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया है।

सख्त सजा का प्रावधान

अटॉर्नी जनरल डॉ. हमद सैफ अल शम्सी ने कहा कि इस तरह के अपराध यूएई के कानून के तहत गंभीर माने जाते हैं।

दोषी पाए जाने पर आरोपियों को कम से कम 1 साल की जेल और कम से कम 1 लाख दिरहम (AED 100,000) का जुर्माना हो सकता है।

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