Edited By Pardeep,Updated: 09 Jan, 2026 02:29 AM
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ (आयात शुल्क) की वैधता पर बड़ा फैसला आ सकता है। अगर कोर्ट आज इस मामले पर अपना फैसला सुनाता है, तो इसका असर सिर्फ व्यापार नीति पर ही नहीं, बल्कि अमेरिका की आर्थिक...
इंटरनेशनल डेस्कः अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ (आयात शुल्क) की वैधता पर बड़ा फैसला आ सकता है। अगर कोर्ट आज इस मामले पर अपना फैसला सुनाता है, तो इसका असर सिर्फ व्यापार नीति पर ही नहीं, बल्कि अमेरिका की आर्थिक स्थिति और सरकारी खजाने पर भी दूरगामी होगा।
हालांकि यह तय नहीं है कि सुप्रीम कोर्ट आज ही फैसला देगा, लेकिन शुक्रवार को कोर्ट ने “डिसीजन डे” तय किया है, यानी इस दिन कई अहम मामलों पर फैसले सुनाए जा सकते हैं। इसी वजह से अटकलें तेज हैं कि टैरिफ से जुड़ा यह मामला भी आज सामने आ सकता है।
कोर्ट के सामने दो बड़े सवाल
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट मुख्य रूप से दो अहम सवालों पर विचार करेगा:
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क्या ट्रंप प्रशासन International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल कर टैरिफ लगा सकता है?
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अगर कोर्ट यह मानता है कि यह तरीका सही नहीं था, तो क्या उन आयातकों (इंपोर्टर्स) को पैसा लौटाना होगा, जिन्होंने पहले ही ये शुल्क चुका दिए हैं?
हालांकि कोर्ट का फैसला इन दोनों के बीच का कोई रास्ता भी हो सकता है। कोर्ट चाहें तो IEEPA के तहत सीमित अधिकार मान्य कर सकता है और सिर्फ आंशिक रिफंड (पैसे की वापसी) का आदेश दे सकता है।
वॉल स्ट्रीट की नजरें फैसले पर
यह मामला वॉल स्ट्रीट और बड़े निवेशकों के लिए बेहद अहम है। सुप्रीम कोर्ट के पास इस संवेदनशील मुद्दे पर फैसला देने की पूरी आज़ादी है और नतीजे कई तरह के हो सकते हैं। अगर कोर्ट व्हाइट हाउस के खिलाफ भी फैसला देता है, तब भी ट्रंप प्रशासन के पास टैरिफ लागू करने के और तरीके मौजूद हैं, जिनमें आपातकालीन कानून का सहारा लेना जरूरी नहीं होगा।
ट्रेजरी सेक्रेटरी ने क्या कहा?
अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने गुरुवार को कहा कि उन्हें कोर्ट से एक “मिश्रित फैसला” (mishmash ruling) आने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, “इसमें कोई शक नहीं है कि हम कुल मिलाकर लगभग इसी स्तर पर टैरिफ से राजस्व वसूलते रहेंगे। लेकिन जो अनिश्चित है, और जो अमेरिकी जनता के लिए दुर्भाग्यपूर्ण होगा, वह यह है कि अगर राष्ट्रपति हारते हैं तो उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा और बातचीत में दबाव बनाने के लिए टैरिफ इस्तेमाल करने की आज़ादी कम हो जाएगी।”
ट्रंप ने IEEPA का इस्तेमाल आंशिक रूप से अमेरिका में फेंटेनिल जैसे खतरनाक ड्रग्स की तस्करी रोकने के लिए भी किया था।
अगर ट्रंप हार गए तो क्या होगा असर?
इंटरएक्टिव ब्रोकर्स के सीनियर इकोनॉमिस्ट जोस टोरेस के मुताबिक, अगर कोर्ट टैरिफ रोक देता है तो इसके कई असर होंगे। उन्होंने कहा, “अगर कोर्ट टैरिफ पर रोक लगाता है, तो प्रशासन कोई न कोई वैकल्पिक रास्ता जरूर निकालेगा। ट्रंप अपने एजेंडे को लेकर बेहद आक्रामक हैं, चाहे विवाद क्यों न हो।”
टोरेस के अनुसार टैरिफ रुकने से अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग (ऑनशोरिंग) को नुकसान होगा। सरकारी वित्तीय स्थिति पर असर पड़ेगा और ब्याज दरें बढ़ सकती हैं लेकिन दूसरी तरफ कंपनियों की कमाई बढ़ सकती है, क्योंकि कच्चे माल की लागत कम होगी और व्यापार ज्यादा सुचारू होगा
फैसले के खिलाफ जाने की संभावना ज्यादा?
भविष्यवाणी बाजार (Prediction Market) साइट Kalshi के मुताबिक, सिर्फ 28% संभावना है कि सुप्रीम कोर्ट मौजूदा रूप में टैरिफ के पक्ष में फैसला देगा। टोरेस का कहना है कि उनकी कंपनी के क्लाइंट्स की सोच भी इसी के आसपास है।
सरकार के पास अभी भी विकल्प
स्कॉट बेसेंट ने बताया कि ट्रंप प्रशासन के पास 1962 के ट्रेड एक्ट के तहत कम से कम तीन और विकल्प हैं, जिनसे ज्यादातर टैरिफ बरकरार रखे जा सकते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी चिंता जताई कि अगर कोर्ट ने रिफंड का आदेश दिया, तो इससे सरकार पर भारी वित्तीय बोझ पड़ेगा और बजट घाटा कम करने की कोशिशों को नुकसान होगा।
ट्रेजरी के आंकड़ों के मुताबिक:
मॉर्गन स्टैनली की राय
मॉर्गन स्टैनली के विश्लेषकों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले में काफी “बारीकी” (nuance) हो सकती है। विश्लेषक एरियाना साल्वाटोर और ब्रैडली टियान के मुताबिक, “कोर्ट टैरिफ को पूरी तरह खत्म करने का आदेश दिए बिना, उनके दायरे को सीमित कर सकता है या भविष्य में इनके इस्तेमाल पर रोक लगा सकता है।” उन्होंने यह भी कहा कि महंगाई और आम लोगों की खर्च क्षमता (affordability) को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ने के कारण सरकार आगे चलकर टैरिफ नीति में नरमी अपना सकती है।
अब तक टैरिफ का असर कैसा रहा?
अब तक टैरिफ का असर कई विश्लेषकों की उम्मीद से अलग रहा है:
अक्टूबर में अमेरिका का ट्रेड डेफिसिट 2009 की वैश्विक वित्तीय संकट के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। उस समय आयात में तेज गिरावट आई थी, जैसी गिरावट अब भी देखी जा रही है।