Edited By Pardeep,Updated: 21 Mar, 2026 11:47 PM

ईरान द्वारा हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया बेस को निशाना बनाने की कथित कोशिश ने वैश्विक सुरक्षा समीकरणों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने दो इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल दागे, हालांकि एक रास्ते में ही फेल हो गई...
इंटरनेशनल डेस्कः ईरान द्वारा हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया बेस को निशाना बनाने की कथित कोशिश ने वैश्विक सुरक्षा समीकरणों पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने दो इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल दागे, हालांकि एक रास्ते में ही फेल हो गई और दूसरी को इंटरसेप्ट किए जाने की बात कही जा रही है।
2000 किमी की सीमा या उससे कहीं ज्यादा?
ईरान अब तक सार्वजनिक रूप से अपनी मिसाइल रेंज 2000 किमी तक बताता रहा है, लेकिन डिएगो गार्सिया लगभग 4000 किमी दूर है। ऐसे में अगर यह हमला सच में किया गया, तो यह संकेत देता है कि ईरान के पास घोषित सीमा से कहीं ज्यादा दूरी तक मार करने की क्षमता हो सकती है।
रणनीतिक संकेत और ‘मिसाइल गेम’
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सिर्फ सैन्य नहीं बल्कि रणनीतिक संदेश भी है। ईरान शायद अपनी असली क्षमता छिपाकर “अनिश्चितता” बनाए रखना चाहता है, ताकि विरोधी देश उसकी ताकत का सही अनुमान न लगा सकें।
अमेरिका-यूके के लिए नई चुनौती
अमेरिका और ब्रिटेन के लिए यह एक नई चुनौती बन सकता है। डिएगो गार्सिया एक अहम सैन्य ठिकाना है, जहां से भारी बमवर्षक और निगरानी विमान ऑपरेट होते हैं। ऐसे में इस बेस को निशाना बनाना सीधे तौर पर अमेरिकी रणनीतिक ताकत को चुनौती देना माना जा रहा है।
मिडिल ईस्ट से हिंद महासागर तक बढ़ा दायरा
इस कोशिश के साथ ही संघर्ष का दायरा मध्य पूर्व से निकलकर हिंद महासागर क्षेत्र तक फैलता दिख रहा है। इससे खाड़ी देशों और Israel पर भी दबाव बढ़ सकता है कि वे अपनी मिसाइल रक्षा प्रणाली को और मजबूत करें।
तकनीकी नतीजे से ज्यादा अहम ‘संदेश’
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने SM-3 इंटरसेप्टर का इस्तेमाल किया, लेकिन उसका नतीजा साफ नहीं है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि तकनीकी सफलता या असफलता से ज्यादा अहम यह है कि ईरान ने यह दिखा दिया कि वह इतने दूर स्थित लक्ष्य को भी निशाना बनाने की कोशिश कर सकता है।
यानी, भले ही मिसाइल अपने लक्ष्य तक न पहुंची हो, लेकिन इस कदम ने वैश्विक रणनीतिक संतुलन को हिला दिया है और ईरान की वास्तविक सैन्य क्षमता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।