Edited By Tanuja,Updated: 12 Jan, 2026 06:28 PM

बलूचिस्तान में पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा दावा सामने आया है। बलूच उग्रवादी गठबंधन BRAS ने 2025 में पाकिस्तानी सेना व खुफिया एजेंसियों पर 174 हमलों की जिम्मेदारी ली है, जिनमें 167 सुरक्षाकर्मियों की मौत का दावा किया गया है।
International Desk : पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत से एक बार फिर गंभीर सुरक्षा संकट की तस्वीर सामने आई है। बलूच राष्ट्रवादी उग्रवादी संगठनों के गठबंधन बलूच राजी आजोई संगर (BRAS) ने दावा किया है कि वर्ष 2025 में उसने पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियों के खिलाफ 174 हमले किए, जिनमें 167 सैन्य और खुफिया कर्मियों की मौत हुई, जबकि 95 अन्य घायल हुए। स्थानीय मीडिया द बलूचिस्तान पोस्ट के मुताबिक, BRAS की 2025 की इन्फोग्राफिक रिपोर्ट में बताया गया है कि इन हमलों के दौरान 26 लोगों को पकड़ा गया, जिनमें पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों के सदस्य भी शामिल थे।
BRAS ने दावा किया कि उसने साल भर में 35 विस्फोट,14 छापामार हमले, 35 कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन किए, 15 अहम ढांचागत ठिकानों को निशाना बनाया, 30 पाक सरकारी व सैन्य वाहन नष्ट किए और 51 हथियार जब्त किए। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगस्त 2025 में BRAS ने खुज़दार जिले के Zehri शहर पर एक बड़े अभियान के तहत एक महीने से ज्यादा समय तक नियंत्रण बनाए रखा। इस दौरान पाकिस्तानी सुरक्षाबलों पर लगातार हमले किए गए, बड़ी संख्या में हथियार और सैन्य उपकरण जब्त किए गए और लड़ाकों ने इलाके में गश्त भी की। BRAS का दावा है कि इस दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों को संबोधित कर जनसभाएं भी कीं।
अन्य बलूच संगठनों के बड़े दावे
- BRAS से जुड़े अन्य संगठनों ने भी 2025 को “निर्णायक वर्ष” बताया है।
- बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) ने 521 हमलों में 1,060 से अधिक पाक सैनिकों की मौत और 556 के घायल होने का दावा किया।
- बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) ने 581 हमलों में 647 सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने और 282 के घायल होने की बात कही।
- बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स (BRG) ने बलूचिस्तान, सिंध और पंजाब में 88 हमलों में 22 पाक कर्मियों की मौत का दावा किया।
पाकिस्तान पर गंभीर मानवाधिकार आरोप
बलूच संगठनों का आरोप है कि बलूचिस्तान में पाकिस्तानी प्रशासन डेथ स्क्वॉड्स को संरक्षण दे रहा है, जो जबरन गायब करने, गैर-न्यायिक हत्याओं और अवैध हिरासत जैसी कार्रवाइयों में शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ये आंकड़े चाहे दावों के स्तर पर हों, लेकिन यह साफ संकेत देते हैं कि बलूचिस्तान में पाकिस्तान की पकड़ कमजोर पड़ती जा रही है और विद्रोह एक नए, खतरनाक चरण में प्रवेश कर चुका है।