Edited By Tanuja,Updated: 14 Jan, 2026 06:01 PM

चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने 2026-2030 की 15वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान भ्रष्टाचार विरोधी अभियान को और सख्त करने का आह्वान किया है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने साफ किया कि भ्रष्टाचार पार्टी और देश की स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा है।
Bejing: चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CPC) ने 2026 से 2030 तक लागू होने वाली 15वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान को और मजबूत करने का ऐलान किया है। यह फैसला पार्टी के अनुशासनात्मक निकाय केंद्रीय अनुशासन निरीक्षण आयोग (CCDI) की पांचवीं पूर्ण बैठक में पारित एक कम्युनिके के जरिए सामने आया। बीजिंग में सोमवार से बुधवार तक चली इस अहम बैठक में राष्ट्रपति शी जिनपिंग, जो CPC के महासचिव और केंद्रीय सैन्य आयोग के अध्यक्ष भी हैं, मौजूद रहे और उन्होंने सख्त संदेश देते हुए कहा कि पार्टी की शुद्धता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
पार्टी के मुखपत्र पीपुल्स डेली ने मंगलवार को लिखा कि आर्थिक विकास और तकनीकी प्रगति भले ही अहम हों, लेकिन भ्रष्टाचार मुक्त शासन कम्युनिस्ट पार्टी का मूल लक्ष्य है। रिपोर्ट में कहा गया कि शी जिनपिंग भ्रष्टाचार को “कैंसर” मानते हैं, जो दुनिया की सबसे बड़ी मार्क्सवादी सत्तारूढ़ पार्टी की जड़ों को कमजोर करता है। अखबार के अनुसार, 2012 से शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीन ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अभूतपूर्व कदम उठाए हैं। यह अभियान सिर्फ पैसों के लेन-देन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें काम में लापरवाही, संसाधनों की बर्बादी, देरी और प्रशासनिक ढिलाई जैसी अनियमितताएं भी शामिल हैं। श्रीलंका के प्रमुख अखबार डेली मिरर ने चीनी मीडिया के हवाले से बताया कि 2025 में रिकॉर्ड 65 वरिष्ठ अधिकारियों को हिरासत में लिया गया, जो पिछले साल की तुलना में 12 प्रतिशत अधिक है। 2020 में यह आंकड़ा सिर्फ 18 था, जो लगातार बढ़ते हुए 2023 में 45 और अब 65 तक पहुंच गया है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन की सेना में भी बड़े पैमाने पर शुद्धिकरण हुआ है। कई शीर्ष सैन्य अधिकारियों को बाहर किया गया, जिससे यह साफ है कि बीजिंग तेजी से सैन्य आधुनिकीकरण के बीच सेना में भ्रष्टाचार को लेकर बेहद गंभीर है।विश्लेषकों का मानना है कि यह सख्ती सुस्त होती अर्थव्यवस्था, नीतिगत चुनौतियों और बढ़ते भू-राजनीतिक दबाव के बीच सत्ता पर नियंत्रण मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा है। प्रांतों, केंद्रीय मंत्रालयों, सरकारी कंपनियों, विश्वविद्यालयों और खासतौर पर वित्तीय क्षेत्र में फैले भ्रष्टाचार पर अब निर्णायक कार्रवाई की जा रही है।