Edited By SHUKDEV PRASAD,Updated: 28 Feb, 2026 11:46 PM

मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई के बीच हालात नाजुक बने हुए हैं।
नेशनल डेस्क: मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई के बीच हालात नाजुक बने हुए हैं। इसी पृष्ठभूमि में United Nations Security Council ने 28 फरवरी 2026 को आपात बैठक बुलाने का फैसला किया है। बैठक न्यूयॉर्क समयानुसार शाम 4 बजे शुरू होगी और इसकी अध्यक्षता ब्रिटेन करेगा।
UN प्रमुख की सख्त चेतावनी
संयुक्त राष्ट्र महासचिव Antonio Guterres ने सभी पक्षों से तुरंत हिंसा रोकने और संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मौजूदा टकराव नहीं थमा तो यह बड़े क्षेत्रीय संघर्ष में बदल सकता है, जिसका खामियाजा आम नागरिकों और पूरे इलाके की स्थिरता को भुगतना पड़ेगा। गुटेरेस ने सदस्य देशों से संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सम्मान करने और कूटनीति के रास्ते पर लौटने का आग्रह किया।
ईरान की मांग: तुरंत कार्रवाई हो
ईरान ने सुरक्षा परिषद और महासचिव को पत्र भेजकर अंतरराष्ट्रीय शांति बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाने की अपील की है। ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi के हस्ताक्षर वाले पत्र में कहा गया है कि हालिया हमले क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। पत्र में परिषद से तत्काल आपात बैठक बुलाने, कथित आक्रामक कार्रवाइयों की निंदा करने और जवाबदेही तय करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की गई है।
तुर्की की कूटनीतिक पहल
स्थिति को लेकर तुर्की ने भी सक्रिय कूटनीति शुरू की है। तुर्की के विदेश मंत्री Hakan Fidan ने अपने ईरानी समकक्ष सहित कई देशों के विदेश मंत्रियों से बातचीत की और तनाव कम करने के उपायों पर चर्चा की।
तुर्की के प्रेसिडेंशियल कम्युनिकेशंस प्रमुख Burhanettin Duran ने कहा कि मौजूदा हालात स्वीकार्य नहीं हैं और तुरंत संवाद बहाल करना जरूरी है। तुर्की ने डिप्लोमैटिक चैनलों के जरिए तनाव कम करने की प्रतिबद्धता जताई है।
वैश्विक समर्थन और बढ़ती चिंता
रूस और चीन ने भी आपात बैठक की मांग का समर्थन किया है और हालिया घटनाओं को अनावश्यक आक्रामकता बताया है। फ्रांस, बहरीन और कोलंबिया सहित कई देशों ने परिषद की बैठक का समर्थन किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष बढ़ा तो इसका असर केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, आर्थिक स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
अब आगे क्या?
सुरक्षा परिषद की यह बैठक मौजूदा संकट में अहम मोड़ साबित हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या कूटनीतिक प्रयास हालात को शांत करने में सफल होंगे या तनाव और गहराएगा।