Edited By Pardeep,Updated: 31 Oct, 2025 10:41 PM

मध्य पूर्व (Middle East) की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान, तुर्की और सऊदी अरब तीनों देश एक नए क्षेत्रीय गठबंधन (Regional Alliance) की दिशा में बढ़ रहे हैं। यह गठबंधन सीधे तौर पर इजराइल के बढ़ते प्रभाव...
इंटरनेशनल डेस्कः मध्य पूर्व (Middle East) की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान, तुर्की और सऊदी अरब तीनों देश एक नए क्षेत्रीय गठबंधन (Regional Alliance) की दिशा में बढ़ रहे हैं। यह गठबंधन सीधे तौर पर इजराइल के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की कोशिश मानी जा रही है। ईरान ने इस पहल की औपचारिक कवायद शुरू कर दी है और अब वह तुर्की व सऊदी अरब दोनों को साथ लेने में जुटा है।
ईरान की पहल और तुर्की-सऊदी को साथ लाने की कोशिश
ईरान की सरकारी एजेंसी इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी (IRNA) के अनुसार, राष्ट्रपति मसीह पेजेशकियन (Masih Pezeshkian) ने तुर्की के साथ नए सामरिक रिश्ते (Strategic Partnership) पर बातचीत शुरू कर दी है। ईरान के विदेश मंत्री भी लगातार तुर्की के शीर्ष नेताओं के संपर्क में हैं और रक्षा सहयोग से लेकर ऊर्जा व्यापार तक कई प्रस्ताव रख चुके हैं।
ईरान अब सऊदी अरब को भी साथ लाने की कोशिश में है। पिछले वर्ष चीन की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच 7 साल बाद कूटनीतिक रिश्ते बहाल हुए थे। अब माना जा रहा है कि तेहरान इस रिश्ते को एक राजनीतिक और सैन्य सहयोग में बदलने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है।
इजराइल का बढ़ता प्रभुत्व और अरब देशों की चिंता
इजराइल ने पिछले कुछ वर्षों में हमास, हिजबुल्लाह और हूती जैसे संगठनों पर कड़ी कार्रवाई कर क्षेत्र में अपना दबदबा बढ़ाया है। लेबनान, सीरिया, इराक और यहां तक कि ईरान में भी उसके सटीक हवाई हमलों ने यह संकेत दिया है कि इजराइल अब मिडिल ईस्ट का “सुपरपावर” बन चुका है।
हाल ही में कतर पर हुए इजराइली हमले ने मुस्लिम देशों की सुरक्षा नीतियों को झकझोर दिया। इसके बाद सऊदी, ईरान और तुर्की ने अपने-अपने स्तर पर नए सुरक्षा ढांचे (Security Structure) पर विचार शुरू किया है।
तीनों देशों की ताकत: आंकड़ों में देखें
तुर्की
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सैन्य बल: 6 लाख एक्टिव सैनिक, 3 लाख रिज़र्व में
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साजो-सामान: 2,238 टैंक, 1,000 तोपें, 300 रॉकेट आर्टिलरी
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नेवी: 17 फ्रिगेट्स, 13 पनडुब्बियां
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वायुसेना: 1,000 विमान, जिनमें 201 फाइटर जेट शामिल
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नाटो सदस्यता के कारण तकनीकी रूप से मजबूत
सऊदी अरब
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सैन्य बल: 1.57 लाख एक्टिव सैनिक, 1.5 लाख पैरामिलिट्री
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एयर फोर्स: 1,000+ विमान
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185 से अधिक हेलिकॉप्टर
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हाल में पाकिस्तान के साथ रक्षा समझौता, जिसमें परमाणु सुरक्षा सहयोग शामिल है
ईरान
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सैनिक: 5.8 लाख एक्टिव, 2 लाख रिज़र्व
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बैलिस्टिक मिसाइलें: करीब 3,000
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ड्रोन टेक्नोलॉजी: शाहेद ड्रोन (जिसका उपयोग रूस कर रहा है)
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सहयोगी देश: चीन और रूस जैसे वैश्विक शक्तियों से करीबी संबंध
संभावित गठबंधन से क्या बदलेगा?
अगर यह ईरान-तुर्की-सऊदी गठबंधन वास्तव में बनता है, तो यह मिडिल ईस्ट की राजनीति में भूकंप जैसा बदलाव ला सकता है। इससे इजराइल के खिलाफ कूटनीतिक और आर्थिक मोर्चा बन सकता है। अमेरिका की वेस्ट एशिया नीति पर भी इसका असर पड़ेगा, क्योंकि तीनों देशों का झुकाव अब एशिया ब्लॉक (चीन-रूस) की ओर बढ़ रहा है। वहीं, अरब लीग और ओआईसी (Organization of Islamic Cooperation) जैसे संगठनों पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा।