वेनेजुएला-ईरान के बाद ट्रंप का निशाना यह देशः ‘आतंकवाद समर्थक’ का लगाया ठप्पा, भारी आर्थिक प्रतिबंध किए लागू

Edited By Updated: 16 Mar, 2026 05:52 PM

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अमेरिका ने क्यूबा को फिर से “आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले देशों” की सूची में डालकर उस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यूबा पर दबाव बढ़ाते हुए संकेत दिया कि अगर बातचीत विफल रही तो वॉशिंगटन सैन्य विकल्पों पर भी...

International Desk: वेनेजुएला-ईरान के बाद ट्रंप की नजर इस देश पर,  ‘आतंकवाद समर्थक’ का लगाया ठप्पा,  भारी आर्थिक प्रतिबंध किए लागू  
वॉशिंगटन/हवाना: वेनेजुएला और ईरान के बाद अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ( Donald Trump) की नजर अब कैरेबियन के द्वीपीय देश है। अमेरिका ने कैरेबियन के द्वीपीय देश क्यूबा ( Cuba) पर एक बार फिर कड़ा रुख अपनाते हुए उसे “आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले देशों” की सूची में दोबारा शामिल कर दिया है। इस फैसले से क्यूबा पर भारी आर्थिक प्रतिबंध लागू हो गए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों से फंड हासिल करना उसके लिए बेहद मुश्किल हो जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने संकेत दिया है कि अगर बातचीत से समाधान नहीं निकलता, तो वॉशिंगटन क्यूबा के खिलाफ और कठोर कदम उठा सकता है। इससे यह अटकलें तेज हो गई हैं कि ईरान के बाद अमेरिका का अगला रणनीतिक लक्ष्य क्यूबा हो सकता है।

 

एयरफोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए  Trump ने कहा कि अमेरिका का मानना है कि क्यूबा समझौते के लिए तैयार हो सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और क्यूबा के बीच बातचीत जारी है। बातचीत से समाधान निकल सकता है, लेकिन यदि ऐसा नहीं हुआ तो अमेरिका को “अन्य विकल्प” अपनाने पड़ सकते हैं।
फिलहाल अमेरिका की प्राथमिकता Iran के साथ चल रहा टकराव है। अमेरिका का मानना है कि क्यूबा दशकों से उन देशों के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए हुए है जिन्हें वॉशिंगटन अपने हितों के खिलाफ मानता है। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि क्यूबा विदेशी खुफिया एजेंसियों को अपने क्षेत्र से काम करने की अनुमति देता है, जो अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है।

 

चीन और रूस की भूमिका से बढ़ी चिंता
अमेरिकी रिपोर्टों के अनुसार चीन ने क्यूबा में इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और जासूसी ढांचे का विस्तार किया है। रूस ने क्यूबा के सैन्य ढांचे के आधुनिकीकरण के लिए रक्षा सहयोग समझौता किया है। चीनी कंपनियां क्यूबा के मारिएल पोर्ट जैसे रणनीतिक बंदरगाहों में निवेश कर रही हैं। इन गतिविधियों को अमेरिका अपने प्रभाव क्षेत्र में चुनौती के रूप में देख रहा है। इस समय Miguel Díaz-Canel के नेतृत्व वाला क्यूबा गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण तेल और वित्तीय लेन-देन में कठिनाई हो रही है। इन हालातों ने देश में विरोध प्रदर्शनों को भी जन्म दिया है, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

 

बता दें कि अमेरिका और क्यूबा के बीच तनाव की जड़ें Cuban Revolution के बाद से हैं, जब Fidel Castro की कम्युनिस्ट सरकार सत्ता में आई और अमेरिकी कंपनियों का राष्ट्रीयकरण किया गया। इसके बाद अमेरिका ने आर्थिक प्रतिबंध लगाए और दोनों देशों के संबंध शीत युद्ध के दौरान बेहद तनावपूर्ण हो गए, जिसका सबसे बड़ा उदाहरण Cuban Missile Crisis था। विश्लेषकों का मानना है कि क्यूबा पर दबाव बढ़ाकर अमेरिका क्षेत्र में अपने प्रभाव को फिर से मजबूत करना चाहता है। रूस और चीन के प्रभाव को कम करना चाहता है। क्यूबा की कम्युनिस्ट सरकार को राजनीतिक और आर्थिक सुधारों के लिए मजबूर करना चाहता है। हालांकि यह भी स्पष्ट है कि अगर तनाव और बढ़ता है तो कैरेबियन क्षेत्र में एक नया भू-राजनीतिक संकट पैदा हो सकता है।
  

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