वेनेजुएला के बाद अमेरिका का अगला टार्गेट कौन? अब इस देश पर मंडरा रहा कब्जे का खतरा

Edited By Updated: 04 Jan, 2026 10:22 PM

following the us action against venezuela a new fear has emerged

वेनेजुएला पर अमेरिका के हमले और वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार किए जाने के बाद अब एक नया डर सामने आया है। यह डर ग्रीनलैंड को लेकर है। अमेरिकी कार्रवाई के तुरंत बाद डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों की ओर से ग्रीनलैंड को लेकर बयान सामने आने लगे...

इंटरनेशनल डेस्कः वेनेजुएला पर अमेरिका के हमले और वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार किए जाने के बाद अब एक नया डर सामने आया है। यह डर ग्रीनलैंड को लेकर है। अमेरिकी कार्रवाई के तुरंत बाद डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों की ओर से ग्रीनलैंड को लेकर बयान सामने आने लगे हैं, जिससे आशंका बढ़ गई है कि अमेरिका ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की कोशिश कर सकता है।

सोशल मीडिया पोस्ट से बढ़ी चिंता

वेनेजुएला पर अमेरिकी एक्शन के कुछ ही घंटों बाद, एक दक्षिणपंथी पॉडकास्टर केटी मिलर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ग्रीनलैंड का एक नक्शा पोस्ट किया। इस नक्शे पर अमेरिकी झंडा बना हुआ था और नीचे लिखा था— “SOON” (जल्द)। केटी मिलर, डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी और पूर्व डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर की पत्नी हैं। इस पोस्ट के सामने आते ही डेनमार्क और ग्रीनलैंड में नाराजगी और चिंता देखने को मिली।

डेनमार्क ने जताई कड़ी आपत्ति

अमेरिका में डेनमार्क के राजदूत जेस्पर मोलर सोरेनसन ने इस पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका और डेनमार्क पुराने और भरोसेमंद सहयोगी रहे हैं और दोनों देश मिलकर आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा के लिए काम करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की सुरक्षा ग्रीनलैंड और डेनमार्क की सुरक्षा से सीधे जुड़ी हुई है। राजदूत ने बताया कि डेनमार्क ने 2025 में अपना रक्षा बजट बढ़ाकर करीब 13.7 अरब डॉलर कर दिया है, ताकि आर्कटिक और नॉर्थ अटलांटिक क्षेत्र की सुरक्षा को और मजबूत किया जा सके। साथ ही उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि डेनमार्क अपनी सीमाओं और संप्रभुता के पूरे सम्मान की उम्मीद करता है।

ग्रीनलैंड के लिए अमेरिका का विशेष दूत

डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में लुइसियाना के गवर्नर जेफ लैंड्री को ग्रीनलैंड के लिए अमेरिका का विशेष दूत नियुक्त किया है। इस नियुक्ति पर दिसंबर में प्रतिक्रिया देते हुए लैंड्री ने कहा था कि ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाना और उनके लिए “सम्मान की बात” होगी। उन्होंने वेनेजुएला में मादुरो सरकार को हटाने की अमेरिकी कार्रवाई का भी समर्थन किया और इसे ड्रग्स के खिलाफ अमेरिका की लड़ाई बताया।

क्यों अहम है ग्रीनलैंड?

डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से ही ग्रीनलैंड को लेकर उनके बयान यूरोपीय देशों की चिंता बढ़ाते रहे हैं। ग्रीनलैंड को रणनीतिक रूप से बहुत अहम माना जाता है क्योंकि यहां भविष्य में खनिज संसाधनों के बड़े भंडार मिलने की संभावना है। यहां अमेरिका का सबसे उत्तरी सैन्य अड्डा पिटुफिक (Pituffik Space Base) मौजूद है। मार्च महीने में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस सैन्य अड्डे का दौरा भी किया था।

ट्रंप पहले भी कर चुके हैं सैन्य कार्रवाई की बात

डोनाल्ड ट्रंप पहले यह कह चुके हैं कि वे ग्रीनलैंड पर कब्जे के लिए सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं करते। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि “अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अमेरिका को ग्रीनलैंड की बहुत जरूरत है।” इन बयानों के बाद डेनमार्क की खुफिया एजेंसी ने अमेरिका को सुरक्षा जोखिम तक बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति अमेरिका और यूरोप के रिश्तों में बड़े बदलाव का संकेत हो सकती है।

ग्रीनलैंड और डेनमार्क का साफ संदेश

डेनमार्क और ग्रीनलैंड— दोनों के प्रधानमंत्रियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी देश की सीमाएं और उसकी संप्रभुता अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत तय होती हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी देश को दूसरे देश पर जबरन कब्जा करने का अधिकार नहीं है। ग्रीनलैंड की लगभग 57 हजार आबादी में से ज्यादातर लोग डेनमार्क से आजादी चाहते हैं लेकिन अमेरिका का हिस्सा बनना नहीं चाहते।

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