2050 तक बूढ़ी हो जाएगी इस देश की पूरी आबादी - युवा न शादी कर रहे न बच्चे... जंग के बीच डराने वाली रिपोर्ट

Edited By Updated: 01 Apr, 2026 08:57 AM

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iran population: ईरान इस समय अपने इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। एक तरफ वह बाहरी हमलों और राजनीतिक अस्थिरता के बीच अपना अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है, तो दूसरी तरफ उसके सामने एक ऐसा 'खामोश संकट' खड़ा हो गया है जो मिसाइलों से भी...

iran population: ईरान इस समय अपने इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। एक तरफ वह बाहरी हमलों और राजनीतिक अस्थिरता के बीच अपना अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है, तो दूसरी तरफ उसके सामने एक ऐसा 'खामोश संकट' खड़ा हो गया है जो मिसाइलों से भी ज्यादा घातक साबित हो सकता है। यह संकट है ईरान की तेजी से बूढ़ी होती आबादी। कभी युवाओं के देश के रूप में पहचाने जाने वाला ईरान अब दुनिया के उन देशों में शामिल हो गया है जहाँ बुजुर्गों की संख्या युवाओं के मुकाबले पांच गुना तेजी से बढ़ रही है।

2050 तक की डरावनी तस्वीर
ईरान के नेशनल डेमोग्राफिक रिसर्च इंस्टीट्यूट आंकड़ों के मुताबिक, ईरान में जनसांख्यिकीय बदलाव इतनी तेजी से हो रहा है कि 2050 तक देश की लगभग 30 प्रतिशत आबादी बुजुर्गों की श्रेणी में होगी। संयुक्त राष्ट्र और ईरान के नेशनल डेमोग्राफिक रिसर्च इंस्टीट्यूट के अनुमान बताते हैं कि अगर यही रुझान जारी रहा, तो अगले 75 वर्षों में ईरान की कुल जनसंख्या वर्तमान की तुलना में आधी से भी कम रह सकती है। फिलहाल देश के 12 प्रतिशत नागरिक 60 साल से ऊपर के हैं, और यह आंकड़ा आने वाले समय में ढाई करोड़ के पार पहुंचने की उम्मीद है।

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क्यों घट रही है युवाओं की संख्या?
ईरान में इस संकट के पीछे कई सामाजिक और आर्थिक कारण छिपे हैं। देश में प्रजनन दर (Fertility Rate) गिरकर 1.6 रह गई है, जो आबादी को स्थिर बनाए रखने के लिए जरूरी स्तर से काफी कम है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों की मार, आसमान छूती महंगाई और बेरोजगारी ने युवाओं के मन में भविष्य को लेकर असुरक्षा भर दी है। इस आर्थिक बोझ के कारण युवा न तो समय पर शादी कर रहे हैं और न ही बच्चे पैदा करने का जोखिम उठा रहे हैं। इसके साथ ही, बेहतर जीवन और अवसरों की तलाश में युवाओं का विदेशों में पलायन करना भी देश के भीतर युवाओं के अनुपात को कम कर रहा है।

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आधुनिक जीवनशैली और स्वास्थ्य का प्रभाव
बढ़ते शहरीकरण और उच्च शिक्षा की चाह ने विवाह की औसत आयु को बढ़ा दिया है, जिससे परिवारों का आकार छोटा होता जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार और बेहतर चिकित्सा सेवाओं ने लोगों की औसत आयु (Life Expectancy) तो बढ़ा दी है, लेकिन इसके साथ ही देश में बुजुर्गों का प्रतिशत भी बढ़ गया है। आज के शादीशुदा जोड़े बच्चों के पालन-पोषण को एक वित्तीय चुनौती मानते हैं, जिससे 'परिवार' नाम की संस्था धीरे-धीरे कमजोर पड़ रही है।

सरकार की कोशिशें और वैश्विक स्थिति
ईरानी सरकार इस संकट को भांपते हुए अब सक्रिय हो गई है। जन्म दर बढ़ाने के लिए परिवारों को आर्थिक सहायता दी जा रही है, गर्भनिरोधकों पर पाबंदी लगाई गई है और गर्भपात को अपराध की श्रेणी में डाल दिया गया है। हालांकि, यह केवल ईरान की समस्या नहीं है। 

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2050 तक पूरी दुनिया में हर छठा व्यक्ति बुजुर्ग
2050 तक पूरी दुनिया में हर छठा व्यक्ति बुजुर्ग होगा। भारत जैसे देशों में भी 2031 तक जनसंख्या वृद्धि दर में भारी गिरावट आने की उम्मीद है, जहां भविष्य में हर सातवां व्यक्ति 65 वर्ष से अधिक आयु का हो सकता है।

ईरान के लिए चुनौती यह है कि वह अपनी सीमाओं की रक्षा के साथ-साथ अपने समाज की युवा ऊर्जा को कैसे वापस लौटाए, क्योंकि बिना युवाओं के किसी भी राष्ट्र की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा को लंबे समय तक संभाले रखना नामुमकिन है।

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