Edited By Tanuja,Updated: 06 Apr, 2026 07:06 PM

पाकिस्तान का कर्ज 80 ट्रिलियन रुपये पार कर गया है और रोज़ाना 26 अरब रुपये बढ़ रहा है। कर्ज-टू-GDP अनुपात 72% पहुंच गया। बढ़ता कर्ज शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों को प्रभावित कर रहा है, जिससे आर्थिक संकट और गहराने की चेतावनी दी गई है।
International Desk: पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को लेकर एक चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें बताया गया है कि देश का कुल कर्ज बढ़कर करीब 80 ट्रिलियन रुपये से ज्यादा हो गया है। पिछले एक साल में ही कर्ज में लगभग 9 ट्रिलियन रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान हर दिन करीब 26 अरब रुपए का नया कर्ज ले रहा है। अगर इसे और छोटे स्तर पर देखें तो हर घंटे 1 अरब रुपये से ज्यादा और हर मिनट लगभग 1.8 करोड़ रुपये का कर्ज बढ़ रहा है।
स्थिति इतनी गंभीर है कि देश की अर्थव्यवस्था जितना उत्पादन करती है, उसका 72 प्रतिशत हिस्सा पहले से ही कर्ज में दबा हुआ है। यानी सरकार के पास विकास और सार्वजनिक सेवाओं के लिए सीमित संसाधन बचते हैं। इस बढ़ते कर्ज का बड़ा हिस्सा सरकारी कंपनियों के घाटे और अन्य खर्चों में जा रहा है। पावर सेक्टर, गैस कंपनियां, रेलवे और राष्ट्रीय एयरलाइन जैसी कई सरकारी संस्थाएं लगातार नुकसान में चल रही हैं, लेकिन उनमें कोई बड़ा सुधार नहीं किया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यही स्थिति जारी रही, तो आने वाले समय में शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे जरूरी क्षेत्रों में निवेश और कम हो जाएगा। कर्ज चुकाने में ही सरकार की आय का बड़ा हिस्सा खर्च हो सकता है। कुल मिलाकर, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर कर्ज का दबाव तेजी से बढ़ रहा है, जिससे भविष्य में और बड़े आर्थिक संकट की आशंका जताई जा रही है।