Edited By Tanuja,Updated: 21 Jan, 2026 03:13 PM

क्षिण कोरिया के पूर्व प्रधानमंत्री हान डक-सू को मार्शल लॉ लागू कराने में अहम भूमिका निभाने और राष्ट्रपति यून सुक-योल की कथित बगावत में सहयोग के दोष में 23 साल कैद की सज़ा सुनाई गई। अदालत ने इसे संविधान के खिलाफ ‘विद्रोह’ करार दिया।
International Desk: दक्षिण कोरिया की राजनीति में ऐतिहासिक मोड़ लाते हुए सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री हान डक-सू को 23 साल की सजा सुनाई है। अदालत ने उन्हें पूर्व राष्ट्रपति यून सुक-योल द्वारा 3 दिसंबर 2024 को लागू किए गए अल्पकालिक मार्शल लॉ में मुख्य भूमिका निभाने और विद्रोह में सहयोग का दोषी ठहराया। यह पहला न्यायिक फैसला है जिसमें अदालत ने स्पष्ट रूप से माना कि दिसंबर 2024 का मार्शल लॉ संविधान के खिलाफ विद्रोह था। विशेष अभियोजक चो यून-सुक की टीम ने हान के लिए 15 साल की सजा की मांग की थी, लेकिन अदालत ने आरोपों की गंभीरता को देखते हुए इससे कहीं कड़ी सजा सुनाई।
अदालत की सख्त टिप्पणी
पीठासीन न्यायाधीश ली जिन-ग्वान ने फैसला सुनाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री होने के नाते हान पर लोकतांत्रिक जिम्मेदारी थी कि वे संविधान की रक्षा करते, लेकिन उन्होंने अंत तक अपने कर्तव्य की अनदेखी की। अदालत ने कहा कि हान ने न केवल कैबिनेट बैठक बुलाने का सुझाव दिया, बल्कि बैठक के दौरान मार्शल लॉ का विरोध भी नहीं किया। इतना ही नहीं, उन्होंने तत्कालीन गृह मंत्री ली सांग-मिन को सरकार विरोधी मीडिया संस्थानों की बिजली-पानी आपूर्ति काटने जैसे आदेश लागू करने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
सबूत मिटाने की आशंका
अदालत ने सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका जताते हुए हान को तुरंत हिरासत में लेने का आदेश दिया। कोर्ट ने यह भी पाया कि मार्शल लॉ हटाए जाने के बाद उसकी वैधता बढ़ाने के लिए एक संशोधित घोषणा पर हस्ताक्षर करना, फिर उसे नष्ट करना और संवैधानिक अदालत में झूठी गवाही देना भी हान के खिलाफ गंभीर अपराध हैं।
यून सुक-योल पर असर
यह फैसला सीधे तौर पर पूर्व राष्ट्रपति यून सुक-योल के मुकदमे को प्रभावित कर सकता है। यून पर भी विद्रोह का नेतृत्व करने का आरोप है। उनका ट्रायल पिछले हफ्ते खत्म हुआ, जिसमें अभियोजन पक्ष ने फांसी की सजा की मांग की है। इस मामले में फैसला 19 फरवरी को आना है। दक्षिण कोरिया के संविधान के अनुसार, विद्रोह वह कृत्य है जिसमें देश के किसी हिस्से से राज्य सत्ता को हटाने या संविधान को पलटने के उद्देश्य से हिंसक या असंवैधानिक कदम उठाए जाएं।