Edited By Ashutosh Chaubey,Updated: 19 May, 2025 02:05 PM
हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके करीबी सहयोगियों द्वारा पाकिस्तान, बांग्लादेश और तुर्की जैसे देशों के साथ बढ़ते संबंधों को लेकर भारत में चिंता का माहौल है।
नेशनल डेस्क: हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके करीबी सहयोगियों द्वारा पाकिस्तान, बांग्लादेश और तुर्की जैसे देशों के साथ बढ़ते संबंधों को लेकर भारत में चिंता का माहौल है। इन देशों के साथ भारत के रिश्ते उतने अच्छे नहीं रहे हैं, और ट्रंप का इन देशों के साथ व्यापारिक और राजनैतिक रिश्ते बढ़ाना भारत के लिए सवाल खड़े करता है। आइए जानते हैं कि ये मामले क्या हैं और क्यों भारत के लिए ये एक चिंता का विषय बन सकते हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल के दिनों में पाकिस्तान, बांग्लादेश और तुर्की जैसे देशों से संबंध बढ़ाने की कोशिश की है। यह एक नई दिशा में उनके कदम उठाने का संकेत है, खासकर जब भारत और इन देशों के रिश्ते जटिल रहे हैं। ट्रंप के परिवार और उनके करीबी सहयोगियों ने इन देशों से व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के प्रयास किए हैं।
पाकिस्तान में ट्रंप परिवार का निवेश और क्रिप्टो करेंसी का कारोबार
पाकिस्तान में ट्रंप परिवार की एक महत्वपूर्ण भूमिका रही है, खासकर क्रिप्टो करेंसी के कारोबार में। ट्रंप के परिवार की कंपनी ने पाकिस्तान के साथ एक क्रिप्टो सौदा किया था, जो अब एक बड़ा मुद्दा बन चुका है। पाकिस्तान में निवेश की संभावनाओं को लेकर ट्रंप के बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर के कॉलेज के दोस्त जेंट्री बीच ने पाकिस्तान का दौरा किया और वहां के संसाधनों के बारे में जानकारी दी। जेंट्री ने ट्रंप सीनियर को बताया कि पाकिस्तान में खनिज, तेल, गैस और रियल एस्टेट के क्षेत्र में अरबों डॉलर के निवेश की संभावना है।
बांग्लादेश में व्यापार की नई संभावनाएं
जेंट्री बीच ने बांग्लादेश में भी निवेश के कई अवसरों की बात की। उन्होंने बांग्लादेश के साथ तेल, गैस, एयरोस्पेस, रक्षा और रियल एस्टेट के क्षेत्र में भारी FDI (विदेशी प्रत्यक्ष निवेश) लाने का वादा किया। बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता और शेख हसीना सरकार के बाद भारत-बांग्लादेश रिश्तों में तनाव बढ़ा है, और अब ट्रंप के करीबी सहयोगियों का वहां के नेताओं से मिलना एक नई चिंता को जन्म देता है।
तुर्की में व्यापारिक सौदों की ओर ट्रंप परिवार
तुर्की में भी ट्रंप परिवार के करीबी सहयोगी जेंट्री बीच ने व्यापारिक सौदों की ओर कदम बढ़ाए हैं। तुर्की में उन्होंने तेल और खनन के क्षेत्र में निवेश करने के लिए एक संयुक्त उद्यम स्थापित करने की कोशिश की। जेंट्री ने तुर्की को चीन की जगह दुनिया की अगली फैक्ट्री बनाने का प्रस्ताव दिया। उनका कहना है कि तुर्की में भी अरबों डॉलर के निवेश की संभावनाएं हैं।
क्या है ट्रंप के इन कदमों की असली वजह?
डोनाल्ड ट्रंप और उनके परिवार के सदस्य जो पाकिस्तान, बांग्लादेश और तुर्की के साथ व्यापारिक संबंध बढ़ा रहे हैं, इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं। एक तरफ, ट्रंप परिवार और उनके सहयोगियों के लिए ये सभी देश व्यापारिक दृष्टिकोण से आकर्षक हैं। दूसरी तरफ, ये कदम अमेरिकी प्रशासन की रणनीति से जुड़े हो सकते हैं, जिसमें ट्रंप और उनके सहयोगियों को वैश्विक व्यापार के नए अवसर तलाशने की कोशिश की जा रही है।
क्रिप्टो काउंसिल का गठन और पाकिस्तान की ओर झुकाव
15 मई को टाइम्स ऑफ इंडिया ने यह जानकारी दी कि ट्रंप परिवार पाकिस्तान में क्रिप्टो काउंसिल की स्थापना को लेकर भी सक्रिय है। यह काउंसिल पाकिस्तान को दक्षिण एशिया का क्रिप्टो हब बनाने के लिए काम कर रही है। इस काउंसिल में ट्रंप परिवार के कई सदस्य शामिल हैं, जिनमें डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और उनके भाई एरिक ट्रंप भी शामिल हैं। पाकिस्तान के साथ यह सौदा भारत के लिए चिंताजनक हो सकता है क्योंकि इससे पाकिस्तान के साथ व्यापारिक रिश्ते और भी मजबूत हो सकते हैं।
भारत के लिए यह चिंता क्यों है?
भारत के लिए यह विकास चिंता का विषय बन सकता है, क्योंकि पाकिस्तान, बांग्लादेश और तुर्की से बढ़ते व्यापारिक और राजनीतिक रिश्ते भारत के लिए असुरक्षा की स्थिति पैदा कर सकते हैं। इन देशों के साथ अमेरिका के बढ़ते संबंधों से भारत की विदेश नीति पर भी असर पड़ सकता है। खासकर जब पाकिस्तान और तुर्की जैसे देशों के साथ भारत के रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण हैं, तब ट्रंप का इन देशों से हाथ मिलाना भारतीय विदेश नीति के लिए चुनौती बन सकता है।