Edited By Radhika,Updated: 05 Jan, 2026 02:22 PM

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी और अमेरिकी सेना के नियंत्रण के बाद दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों में हड़कंप मच गया है। दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल भंडार वाले देश वेनेजुएला के इस संकट का सीधा असर भारत पर भी पड़ता दिख रहा है। वर्तमान...
नेशनल डेस्क: वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी और अमेरिकी सेना के नियंत्रण के बाद दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों में हड़कंप मच गया है। दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल भंडार वाले देश वेनेजुएला के इस संकट का सीधा असर भारत पर भी पड़ता दिख रहा है। वर्तमान में वेनेजुएला में राजनीतिक अस्थिरता है और तेल उत्पादन पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं।
भारत के लिए क्यों बढ़ी मुश्किल?
भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है। हालांकि बीते एक दशक में वेनेजुएला से आयात कम हुआ है, लेकिन 2024-25 में वेनेजुएला एक बार फिर भारत का अहम तेल Supplier बनकर उभरा था। 2024 में भारत ने करीब 22 मिलियन बैरल तेल वहां से खरीदा। लेकिन अब अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के तेल क्षेत्र पर नियंत्रण और खरीदारों पर 'टैरिफ' की धमकी ने भारत जैसे देशों की चिंता बढ़ा दी है।

रूस के बाद अब वेनेजुएला पर 'टैरिफ' की तलवार
भारत पहले से ही रूस से तेल खरीदने को लेकर अमेरिकी दबाव झेल रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिए हैं कि यदि भारत ने रूसी तेल की खरीद कम नहीं की, तो उस पर भारी टैरिफ लगाए जा सकते हैं। ऐसे में वेनेजुएला का संकट 'करेले पर नीम चढ़ा' जैसा साबित हो सकता है। अगर वैश्विक बाजार में सप्लाई कम होती है, तो कच्चे तेल की कीमतें $70-$80 के पार जा सकती हैं, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल और माल ढुलाई महंगी हो सकती है।
व्यापारिक रिश्तों पर असर
भारत और वेनेजुएला के बीच गहरे रिश्ते रहे हैं। भारत ने हाल ही में वहां दवाओं और वैक्सीन की बड़ी खेप भेजी है। इसके अलावा दोनों देशों के बीच डिजिटल सहयोग को लेकर भी समझौते हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वेनेजुएला पर पूरी तरह अमेरिकी प्रभाव बढ़ता है, तो भारत को वहां से तेल खरीदने के लिए वाशिंगटन के कड़े नियमों और लाइसेंसिंग का सामना करना पड़ सकता है।