Edited By Tanuja,Updated: 01 Nov, 2026 11:51 AM

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ईरान के बचे हुए एक-दो परमाणु ठिकानों को 10 मिनट में तबाह कर सकता है। उन्होंने पिकैक्स माउंटेन का नाम लिया। ट्रंप के मुताबिक, ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन अमेरिका सैन्य कार्रवाई का...
Washington: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को एक बार फिर कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सेना ईरान के बचे हुए एक-दो परमाणु ठिकानों को सिर्फ 10 मिनट में निशाना बनाकर तबाह कर सकती है। ट्रंप ने विशेष रूप से भूमिगत परमाणु ठिकाने 'पिकैक्स माउंटेन' का जिक्र किया। हालांकि, उन्होंने तत्काल हमले की जल्दबाजी से इनकार करते हुए कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन उसका भरोसा नहीं किया जा सकता। ट्रंप ने शनिवार को फ्लोरिडा स्थित अपने मार-ए-लागो आवास पर आयोजित हैलोवीन कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत में यह बयान दिया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ईरान की नौसेना, वायुसेना, हवाई रक्षा प्रणाली और सैन्य उपकरणों को पहले ही भारी नुकसान पहुंचा चुका है।
इसके अलावा ईरान की हथियार निर्माण क्षमता और परमाणु कार्यक्रम को भी निशाना बनाया गया है। ट्रंप ने कहा, "हमने उनके परमाणु ठिकानों को तबाह कर दिया है। अभी एक या दो ठिकानों से निपटना बाकी है, लेकिन हम ऐसा 10 मिनट में कर सकते हैं।"उन्होंने भूमिगत परमाणु ठिकाने पिकैक्स माउंटेन का नाम लेते हुए कहा कि अमेरिका उसे भी बहुत तेजी से निशाना बना सकता है। पश्चिमी खुफिया एजेंसियों ने इस स्थान को परमाणु सामग्री के संभावित भंडारण केंद्र के रूप में चिह्नित किया है। हालांकि, ईरान वहां किसी परमाणु गतिविधि से इनकार करता रहा है।
सैन्य कार्रवाई की धमकियों के बीच ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान अमेरिका के साथ समझौता करना चाहता है। हालांकि, उन्होंने तेहरान की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। ट्रंप ने कहा, "वे समझौता करना चाहते हैं और हम देखेंगे कि वे ऐसा करते हैं या नहीं। लेकिन वे बहुत भरोसेमंद नहीं हैं। वे समझौता करते हैं और फिर पीछे हट जाते हैं।" जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका दोबारा ईरान पर हमला करने जा रहा है, तो उन्होंने सवाल को बेवकूफाना बताते हुए कहा कि अगर वह ऐसा करने का फैसला लेते हैं तो क्या पत्रकारों को पहले से इसकी जानकारी देंगे?
मार्को रुबियो बोले- ईरान से बातचीत लगातार जारी
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी स्पष्ट किया कि ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत बंद नहीं हुई है। जॉर्जिया में जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सीधे और मध्यस्थों के जरिए लगातार संवाद हो रहा है। रुबियो ने कहा कि अमेरिका ऐसे किसी भी कूटनीतिक समझौते के लिए तैयार है, जो उसकी बुनियादी सुरक्षा चिंताओं का समाधान करे। इनमें ईरान का परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सशस्त्र संगठनों को उसका समर्थन प्रमुख मुद्दे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप ने अभी तक ईरान पर दोबारा सैन्य कार्रवाई करने का कोई फैसला नहीं लिया है। हालांकि, जरूरत पड़ने पर अमेरिका अपने सैन्य उद्देश्यों को हासिल करने में सक्षम है।
नेतन्याहू से ट्रंप की बातचीत
'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने शनिवार को इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत भी की। यह बातचीत ऐसे समय हुई जब वाशिंगटन ईरान पर दोबारा बड़े सैन्य हमले करने के विकल्पों पर विचार कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले ट्रंप ने व्हाइट हाउस में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ बैठक कर संभावित सैन्य कार्रवाई की रणनीति पर चर्चा की थी। दूसरी ओर, ईरान की तरफ से भी कूटनीतिक बातचीत को लेकर कुछ सकारात्मक संकेत मिले हैं। ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी मोहसेन रजाई ने कहा कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की ओर से कतर के मध्यस्थों के जरिए भेजे गए पत्र में वाशिंगटन का रुख पूरी तरह बदला हुआ नजर आया है।
ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी से बातचीत में रजाई ने इसे सकारात्मक संकेत बताया। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी बातचीत शुरू करने की अमेरिकी कोशिश को सकारात्मक कदम बताया है। 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' के मुताबिक, प्रस्ताव में जेडी वेंस के नेतृत्व में सीधे बातचीत की संभावना है और शुरुआत से ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम को चर्चा में शामिल करने की बात कही गई है। हालांकि, 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' के अनुसार, पत्र में अंतिम शांति शर्तों के बजाय बातचीत का एक ढांचा पेश किया गया है। इस बीच ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका और इजराइल को चेतावनी दी है कि उनकी ओर से किसी भी तरह की गलती या नए हमले का जवाब भौगोलिक सीमाओं से परे जाकर दिया जाएगा।