Edited By Parveen Kumar,Updated: 27 Sep, 2025 12:38 AM

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को अधिसूचना जारी कर मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के कई हिस्सों को अगले छह महीने के लिए ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित कर दिया है। इन इलाकों में सशस्त्र बल (विशेषाधिकार) अधिनियम, 1958 (AFSPA) लागू रहेगा।
नेशनल डेस्क: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को अधिसूचना जारी कर मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश के कई हिस्सों को अगले छह महीने के लिए ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित कर दिया है। इन इलाकों में सशस्त्र बल (विशेषाधिकार) अधिनियम, 1958 (AFSPA) लागू रहेगा।
मणिपुर में ज्यादातर इलाकों पर लागू रहेगा कानून
लगातार दो साल से हिंसा और अशांति झेल रहे मणिपुर में 5 जिलों के 13 पुलिस थाना क्षेत्रों को छोड़कर पूरे राज्य में AFSPA लागू रहेगा। यह विस्तार 1 अक्टूबर 2025 से प्रभावी होगा और अगले छह महीने तक लागू रहेगा।
नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में भी बढ़ाया गया दायरा
नागालैंड के 9 जिलों और 5 अन्य जिलों के 21 थाना क्षेत्रों को भी ‘अशांत क्षेत्र’ घोषित किया गया है। वहीं, अरुणाचल प्रदेश के तिरप, चांगलांग और लोंगडिंग जिलों के साथ नामसाई जिले के 3 थाना क्षेत्रों में AFSPA लागू रहेगा।
आलोचना के घेरे में रहता है AFSPA
AFSPA को एक कठोर कानून माना जाता है, क्योंकि यह सुरक्षा बलों को तलाशी, गिरफ्तारी और जरूरत पड़ने पर गोली चलाने जैसे व्यापक अधिकार देता है। मानवाधिकार संगठनों द्वारा इसकी लगातार आलोचना की जाती रही है।
मणिपुर के 13 थाना क्षेत्र बाहर
गृह मंत्रालय ने अधिसूचना में साफ किया है कि इंफाल पश्चिम (इंफाल, लांफाल, सिटी, सिंगजामेई, पटसोई, वांगोई), इंफाल पूर्व (पोरोमपाट, हेइंगांग, इरिलबुंग), थौबल (थौबल), बिष्णुपुर (बिष्णुपुर, नाम्बोल) और काकचिंग (काकचिंग) थानों के इलाकों में AFSPA लागू नहीं होगा।
मणिपुर में जारी है तनाव
मणिपुर में जातीय हिंसा की आग अभी भी शांत नहीं हुई है। मई 2023 से अब तक 260 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। 13 फरवरी से राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू है। इससे पहले मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने हिंसा के बीच 9 फरवरी को इस्तीफा दे दिया था।