Edited By Pardeep,Updated: 07 Apr, 2026 12:13 AM

अहमदाबाद के चांदखेड़ा इलाके से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। शहर में मिलावटी खाने की शिकायतों के बीच, बाजार से खरीदे गए रेडीमेड डोसा बैटर से बना खाना एक परिवार के लिए जानलेवा साबित हुआ।
नेशनल डेस्कः अहमदाबाद के चांदखेड़ा इलाके से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। शहर में मिलावटी खाने की शिकायतों के बीच, बाजार से खरीदे गए रेडीमेड डोसा बैटर से बना खाना एक परिवार के लिए जानलेवा साबित हुआ। चांदखेड़ा में रहने वाले विमल प्रजापति और भावना प्रजापति ने एक स्थानीय डेयरी से डोसे का घोल खरीदा था। इसे खाने के बाद पूरे परिवार को तेज उल्टी-दस्त शुरू हो गए, जो बाद में फूड पॉइजनिंग में बदल गया। इस दर्दनाक घटना में 3 महीने की बच्ची राहा और 4 साल की बच्ची मिश्री की इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं, माता-पिता भावना और विमल एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं, जहां उनकी हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है।
3 महीने की बच्ची की मौत पर उठे सवाल
घटना के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि इतनी छोटी बच्ची की मौत कैसे हुई, क्योंकि वह ठोस आहार नहीं लेती। शक जताया जा रहा है कि मां ने डोसा खाने के बाद जब बच्ची को स्तनपान कराया, तो उसका असर बच्ची पर पड़ा।
परिवार का आरोप—डेयरी के घोल से हुआ हादसा
विमल के पिता गौरीशंकर प्रजापति ने बताया कि 1 अप्रैल की रात करीब 8 बजे IOC रोड स्थित एक डेयरी से डोसे का घोल खरीदा गया था।अगले दिन सुबह घोल खाने के बाद विमल की तबीयत बिगड़ी, लेकिन कारण का पता नहीं चल पाया। इसके बाद उसी घोल से बच्ची को भी डोसा खिलाया गया, जिससे उसकी तबीयत भी खराब हो गई। परिवार ने इस मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
डेयरी मालिक ने आरोपों को बताया गलत
डेयरी के मालिक केतन पटेल ने सभी आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा, “हम रोज 100-125 किलो घोल बेचते हैं। उसी बैच का घोल सैकड़ों लोगों ने इस्तेमाल किया, किसी को कोई समस्या नहीं हुई।” उनके भाई विपुलभाई ने बताया कि CCTV जांच में पाया गया कि उसी ड्रम से कई लोगों ने घोल खरीदा था और किसी को कोई दिक्कत नहीं हुई। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर घोल खराब होता, तो सिर्फ एक ही परिवार क्यों प्रभावित हुआ?
जांच जारी, सैंपल FSL भेजे गए
अहमदाबाद पुलिस और अहमदाबाद नगर निगम के खाद्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची और खाने के सैंपल इकट्ठे किए। अब असली वजह जानने के लिए सैंपल फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला भेजे गए हैं। बच्चों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि यह मामला फूड पॉइजनिंग का था या खाने में किसी तरह की मिलावट की गई थी।
फिलहाल यह घटना पूरे इलाके में डर और चिंता का माहौल पैदा कर रही है, और लोग बाजार से मिलने वाले खाने की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठा रहे हैं।