Edited By Anu Malhotra,Updated: 16 May, 2026 12:21 PM

Hantavirus: दुनिया भर में चिंता बढ़ाने वाला Andes Hantavirus एक बार फिर सुर्खियों में है। हाल ही में MV Hondius क्रूज़ शिप पर हुए संक्रमण के मामले ने वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। इस वायरस से 11 लोग संक्रमित हुए और 3 लोगों...
Hantavirus: दुनिया भर में चिंता बढ़ाने वाला Andes Hantavirus एक बार फिर सुर्खियों में है। हाल ही में MV Hondius क्रूज़ शिप पर हुए संक्रमण के मामले ने वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। इस वायरस से 11 लोग संक्रमित हुए और 3 लोगों की मौत हो गई।
क्या है मामला?
अप्रैल में एक क्रूज़ जहाज़ पर अचानक कई लोग बीमार पड़ने लगे। जांच में पता चला कि यह संक्रमण हंतावायरस के एक खतरनाक स्ट्रेन-Andes Hantavirus-से जुड़ा हो सकता है। इसके बाद यात्रियों और क्रू मेंबर्स को निगरानी में रखा गया।
क्यों है यह वायरस चिंताजनक?
वैज्ञानिकों के अनुसार यह वायरस सिर्फ चूहों से ही नहीं, बल्कि इंसान से इंसान में भी फैल सकता है। कुछ रिसर्च में यह संकेत मिला है कि यह शरीर के तरल पदार्थों जैसे लार, स्तन दूध और स्पर्म के जरिए भी फैल सकता है। इस वायरस के बारे में सबसे बड़ी अनिश्चितता यह भी है कि यह इंसान के शरीर में कितने समय तक सक्रिय रह सकता है और कितने समय तक दूसरों में फैलने की क्षमता रखता है। यही सबसे बड़ा वैज्ञानिक सवाल बना हुआ है।
WHO की नई स्टडी
WHO की टीम इस वायरस पर विशेष शोध कर रही है। WHO की उभरती बीमारियों की विशेषज्ञ टीम इसके प्राकृतिक व्यवहार (Natural History) को समझने की कोशिश कर रही है। इस स्टडी में क्वारंटाइन में रखे गए लोगों के नियमित सैंपल लिए जा रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके:
-वायरस शरीर में कितने समय तक रहता है
-क्या रिकवरी के बाद भी संक्रमण का खतरा रहता है
-और क्या यह लंबे समय तक शरीर में छिपा रह सकता है
सबसे बड़ी चिंता क्या है?
अगर यह साबित हो जाता है कि वायरस शरीर में लंबे समय तक सक्रिय रह सकता है, तो इसका मतलब होगा कि ठीक हो चुके मरीज भी दूसरों को संक्रमित कर सकते हैं। इससे संक्रमण नियंत्रण और मुश्किल हो जाएगा।
इलाज और सावधानियां
फिलहाल इस वायरस का कोई विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है। डॉक्टर केवल सहायक इलाज (supportive care) देते हैं जैसे:
-ऑक्सीजन सपोर्ट
-दर्द और बुखार की दवाएं
-फेफड़ों की निगरानी
आगे क्या होगा?
वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि आने वाले महीनों में इस स्टडी के नतीजे सामने आएंगे। इसके बाद यह तय करना आसान होगा कि संक्रमित व्यक्ति को कितने समय तक आइसोलेशन में रखना चाहिए और किन सावधानियों की जरूरत है।