'बेटा लौट आया…': 20 दिन बाद पाकिस्तान के कैद घर लौटा BSF जवान पूर्णम, मां-बाप की आंखों में छलक उठे आंसू

Edited By Updated: 14 May, 2025 11:57 AM

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20 दिन की बेचैनी, हर सुबह बेटे की खबर की उम्मीद और हर रात आंखों में उठते सवाल—आज उस मां-बाप की सांस में सुकून लौट आया, जिनका लाल सरहद पार पाकिस्तान की हिरासत में था। बीएसएफ जवान पूर्णम कुमार की आज वतन वापसी हुई, और जैसे ही खबर पहुंची, पश्चिम बंगाल...

नेशनल डेस्क: 20 दिन की बेचैनी, हर सुबह बेटे की खबर की उम्मीद और हर रात आंखों में उठते सवाल—आज उस मां-बाप की सांस में सुकून लौट आया, जिनका लाल सरहद पार पाकिस्तान की हिरासत में था। बीएसएफ जवान पूर्णम कुमार की आज वतन वापसी हुई, और जैसे ही खबर पहुंची, पश्चिम बंगाल के छोटे से कस्बे में खुशी की लहर दौड़ गई। मां की आंखें नम थीं, लेकिन चेहरा मुस्कुरा रहा था—क्योंकि उनका बेटा सुरक्षित लौट आया था।

पूर्णम को पाकिस्तान रेंजर्स ने 23 अप्रैल को फिरोजपुर सेक्टर में गलती से सीमा पार कर जाने के बाद हिरासत में लिया था। तीन हफ्तों की राजनयिक बातचीत और सैन्य प्रयासों के बाद मंगलवार सुबह अटारी सीमा पर उन्हें भारतीय अधिकारियों को सौंपा गया। इस वापसी ने न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे देश को राहत की सांस दी है।

पीके साहू, जो पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के रिशरा के रहने वाले हैं, पंजाब के फिरोजपुर सेक्टर में तैनात थे। वे नियमित ड्यूटी के दौरान सीमांत खेतों के पास थे और स्थानीय किसानों के बीच एक पेड़ की छांव में थोड़ी देर बैठने के इरादे से आगे बढ़े। उसी दौरान अनजाने में सीमा पार कर गए। वर्दी और सर्विस राइफल के साथ पकड़े गए साहू को पाकिस्तानी रेंजर्स ने तुरंत हिरासत में ले लिया।

इस घटना के बाद BSF ने कई बार फ्लैग मीटिंग कर पाकिस्तान से जवान की रिहाई की मांग की, लेकिन अब तक कोई सफलता नहीं मिली है। जवान की पत्नी रजनी साहू ने भी हाल ही में चंडीगढ़ जाकर बीएसएफ अधिकारियों से मुलाकात की थी। वे भावुक होकर कहती हैं, “मैं बस इतना जानना चाहती हूं कि मेरे पति सुरक्षित हैं या नहीं। अधिकारी सिर्फ ये कहते हैं कि चिंता न करें, लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं दे रहे।” रजनी ने स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के बावजूद चंडीगढ़ की यात्रा की, लेकिन फिरोजपुर जाने की अनुमति नहीं मिलने पर उन्हें वापस भेज दिया गया।

पीके साहू के माता-पिता ने भी केंद्र सरकार से अपील की थी कि उनके बेटे की सुरक्षित वापसी के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं। उनकी मां ने कहा, “हर पल चिंता में बीत रहा है। हम सरकार और बीएसएफ से बस यही चाहते हैं कि हमारा बेटा सही-सलामत लौट आए।”

अब जब ऑपरेशन सिंदूर के बाद हालात कुछ सामान्य हो रहे हैं और दोनों देशों के सैन्य अधिकारी बातचीत की टेबल पर लौटते दिखे जिस बीच बीएसएफ जवान पूर्णम कुमार को रिहा कर दिया गया। 

 

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