Edited By Anu Malhotra,Updated: 10 Jan, 2026 03:07 PM

आम बजट के पेश होने में अब कुछ ही समय शेष है, लेकिन उससे पहले वाहन चालकों के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आ रही है। दिग्गज ब्रोकरेज फर्म जेएम फाइनेंशियल (JM Financial) के एक ताजा विश्लेषण के अनुसार, केंद्र सरकार 1 फरवरी को आने वाले बजट से पहले पेट्रोल...
नेशनल डेस्क: आम बजट के पेश होने में अब कुछ ही समय शेष है, लेकिन उससे पहले वाहन चालकों के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आ रही है। दिग्गज ब्रोकरेज फर्म जेएम फाइनेंशियल (JM Financial) के एक ताजा विश्लेषण के अनुसार, केंद्र सरकार 1 फरवरी को आने वाले बजट से पहले पेट्रोल और डीजल पर 3 से 4 रुपये प्रति लीटर तक उत्पाद शुल्क (Excise Duty) बढ़ा सकती है।
क्यों लग रही है शुल्क वृद्धि की अटकलें?
इस संभावित बढ़ोतरी के पीछे दो मुख्य कारण बताए जा रहे हैं: सरकारी खजाने पर दबाव: चालू वित्त वर्ष (FY2026) में सरकार की राजस्व प्राप्ति (Revenue Collection) उम्मीद से धीमी रही है। नवंबर तक लक्ष्य का केवल 56% हिस्सा ही जमा हो पाया है। राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए सरकार को अतिरिक्त आय की सख्त जरूरत है।
वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल (ब्रेंट क्रूड) $61 प्रति बैरल के आसपास है। इससे भारतीय तेल कंपनियों का मार्जिन ऐतिहासिक औसत (₹3.50) के मुकाबले कहीं ज्यादा, यानी लगभग ₹10.60 प्रति लीटर तक पहुंच गया है। सरकार इस बढ़े हुए मुनाफे का एक हिस्सा टैक्स के रूप में हासिल करना चाहती है।
सरकारी तिजोरी में कितनी आएगी 'रौनक'?
जेएम फाइनेंशियल के आंकड़ों के मुताबिक, ईंधन पर टैक्स बढ़ाना सरकार के लिए आय का सबसे आसान जरिया है। इसका गणित कुछ इस प्रकार है:
₹1 की वृद्धि = ₹17,000 करोड़: पेट्रोल-डीजल पर महज 1 रुपये शुल्क बढ़ाने से सालाना राजस्व में 17 हजार करोड़ रुपये का इजाफा होता है।
कुल अनुमानित लाभ: यदि सरकार 3-4 रुपये की बढ़ोतरी करती है, तो सालाना तौर पर 50,000 से 70,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हो सकता है। यह राशि देश की जीडीपी का लगभग 0.15% से 0.2% हिस्सा होगी।
तेल कंपनियों (OMCs) पर क्या होगा प्रभाव?
शुल्क में बदलाव का सीधा असर HPCL, BPCL और IOCL जैसी कंपनियों के मुनाफे (EBITDA) पर पड़ता है। रिपोर्ट कहती है कि अगर मार्केटिंग मार्जिन में 1 रुपये का भी फेरबदल होता है, तो इन कंपनियों की आय में 12% से 17% तक का उतार-चढ़ाव आ सकता है। इसमें सबसे ज्यादा असर HPCL पर पड़ने की संभावना है।
आम आदमी के लिए इसका क्या मतलब है?
यदि सरकार उत्पाद शुल्क बढ़ाती है, तो कंपनियां इसका बोझ ग्राहकों पर डाल सकती हैं, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल आ सकता है। हालांकि, सरकार का मुख्य उद्देश्य अगले वित्त वर्ष (FY2027) के लिए राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को घटाकर 4-4.2% तक लाना है, जिसके लिए कठोर वित्तीय फैसलों की उम्मीद की जा रही है।