क्या अब देश पर मंडराएगा health Emergency का खतरा? खत्म होने वाला है इन दवाइयों का स्टॉक, जानिए क्या है वजह?

Edited By Updated: 18 Mar, 2026 05:39 PM

crude oil crisis puts a brake on paracetamol supplies

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव से दुनियाभर में टेंशन वाला माहौल बना हुआ है। स्ट्रैट ऑफ होर्मुज, जहाँ से दुनिया का 20% कच्चा तेल गुजरता है, उसके बंद होने की आहट ने अब 'फार्मा सेक्टर' की नींद उड़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह सप्लाई...

नेशनल डेस्क: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव से दुनियाभर में टेंशन वाला माहौल बना हुआ है। स्ट्रैट ऑफ होर्मुज, जहाँ से दुनिया का 20% कच्चा तेल गुजरता है, उसके बंद होने की आहट ने अब 'फार्मा सेक्टर' की नींद उड़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह सप्लाई चेन टूटी, तो न सिर्फ दवाइयां महंगी होंगी, बल्कि कई दवा कंपनियां हमेशा के लिए बंद भी हो सकती हैं।

पेट्रोलियम और दवा का 'गहरा रिश्ता'

ज्यादातर लोग समझते हैं कि कच्चा तेल सिर्फ पेट्रोल-डीजल के लिए है, लेकिन हकीकत यह है कि हमारी रोजमर्रा की दवाइयां पेट्रोकेमिकल्स की बुनियाद पर खड़ी हैं। रिफाइनरी से निकलने वाले बेंजीन, टोल्यून और एथिलीन जैसे केमिकल्स से ही दवाओं के API (Active Pharmaceutical Ingredients) तैयार होते हैं।

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इन जरूरी दवाओं पर पड़ेगा सीधा असर:

चीफ स्पेशलिस्ट सरफराज अहमद के अनुसार, कई जीवनरक्षक दवाएं सीधे तौर पर पेट्रोलियम उत्पादों पर निर्भर हैं:

  • पेरासिटामोल (Paracetamol): इसका मुख्य घटक 'फिनोल' एक पेट्रोलियम उत्पाद है।
  • एस्पिरिन (Aspirin): यह बेंजीन से तैयार की जाती है।
  • मेटफॉर्मिन (Metformin): डायबिटीज की यह दवा 80–90% पेट्रोकेमिकल आधारित है।
  • इबुप्रोफेन (Ibuprofen): दर्द निवारक यह दवा भी आइसोब्यूटिलबेंजीन से बनती है।

सिर्फ गोली नहीं, पूरा अस्पताल है तेल पर निर्भर

दवाओं के अलावा मेडिकल सिस्टम की रीढ़ मानी जाने वाली चीजें भी कच्चे तेल से ही बनती हैं:

  • मेडिकल इक्विपमेंट: सिरिंज, IV बैग, कैथेटर और पैकेजिंग प्लास्टिक।
  • वैक्सीन: सीरम इंस्टीट्यूट जैसे बड़े उत्पादक भी लिपिड नैनोपार्टिकल्स और सॉल्वेंट्स के लिए इसी चेन पर निर्भर हैं।
  • कोटिंग: टैबलेट और कैप्सूल की कोटिंग में इस्तेमाल होने वाले पॉलिमर।

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भारत के लिए 'खतरे की घंटी'

भारत दुनिया की 20% जेनेरिक दवाओं का उत्पादन करता है, लेकिन भारत की मेथनॉल सप्लाई का 87.7% हिस्सा होर्मुज मार्ग से आता है।

एनालिस्ट शनाका अंसेलम परेरा के मुताबिक कंपनियों के पास केवल 3 से 6 महीने का स्टॉक बचा है। अगर सप्लाई बहाल नहीं हुई, तो दवा उत्पादन ठप हो सकता है और कीमतें आसमान छू सकती हैं।

 

 

 

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