Edited By Tanuja,Updated: 13 Jan, 2026 06:02 PM

इजराइली फिल्म निर्माता डैन वोलमैन की नई फिल्म ‘मर्डर्स टू क्लोज, लव टू फार’ 2012 के निर्भया कांड के बाद भारत में हुए जनआंदोलनों से प्रेरित है। यह भारत-इजराइल की पहली संयुक्त सह-निर्देशित फिल्म है, जिसे पुणे अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में दिखाया...
International Desk: इजराइली फिल्म निर्माता डैन वोलमैन ने कहा कि उनकी नयी फिल्म ‘‘मर्डर्स टू क्लोज, लव टू फार'' का विचार उन्हें 2012 में भारत यात्रा के दौरान आया, जब दिल्ली में एक फिजियोथेरेपी इंटर्न (निर्भया) के साथ हुए सामूहिक बलात्कार व उसकी हत्या के विरोध में व्यापक प्रदर्शन हो रहे थे। ‘‘फ्लोच'', ‘‘माई माइकल'', ‘‘ऐन इजराइली लव स्टोरी'' और ‘‘वैली ऑफ स्ट्रेंथ'' जैसी फिल्मों के लिए मशहूर वोलमैन ने भारतीय फिल्म निर्माता मंजू बोरा के साथ मिलकर इस ‘मर्डर मिस्ट्री' का सह-निर्देशन किया है। यह ऐसी पहली फिल्म है जिसका सह-निर्माण भारत और इजराइली फिल्मकारों ने किया है।
इसे 24वें पुणे अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (पीआईएफएफ) में प्रदर्शित किया जाएगा। वोलमैन ने कहा, ‘‘28 दिसंबर 2012 को, मैं अपनी फिल्म 'गेई ओनी (वैली ऑफ स्ट्रेंथ)' के साथ नयी दिल्ली अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में शामिल हुआ था। इससे कुछ दिन पहले, सामूहिक बलात्कार और हत्या की भयावह घटना हुई थी। उस घटना के बाद, मैंने दिल्ली की सड़कों पर मुख्य रूप से महिलाओं द्वारा किए गए विशाल प्रदर्शन और रैलियां देखी थीं।'' उन्होंने बताया कि फिल्म 'मर्डर टू क्लोज - लव टू फार' का विचार तभी आया। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने असम में रहने वाली अपनी दोस्त मंजू बोरा को अपने इस विचार के बारे में लिखा और सौभाग्य से वह मेरे साथ फिल्म का सह-निर्माण और सह-निर्देशन करने के लिए सहमत हो गईं।''
वोलमैन ने बताया कि फिल्म की शूटिंग भारत में हुई है और इसमें ‘‘यौन उत्पीड़न, हिंसा, भ्रष्टाचार, समूह के व्यवहार, गिरोह और भीड़ की मानसिकता'' जैसे विषयों को उठाया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘ये मुद्दे इजराइल में भी उतने ही आम हैं जितने दुनिया के अन्य हिस्सों में। मैंने अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और चीन में फिल्में बनाई हैं और सभी मिलती-जुलती कहानियों, मुद्दों और समस्याओं का सामना करते हैं।'' पीआईएफएफ में, ‘‘मर्डर्स टू क्लोज, लव टू फार'' को 17 और 19 जनवरी को ग्लोबल सिनेमा श्रेणी के हिस्से के रूप में प्रदर्शित किया जाएगा। वोलमैन 20 वर्षों से अधिक समय से पीआईएफएफ से जुड़े हुए हैं। वह कई भारतीय फिल्म समारोहों में निर्णायक मंडल का हिस्सा रहे हैं।