Mahakumbh में जाने के लिए श्रद्धालु ने ऑटो-रिक्शा से तय किया 1875 KM का सफर

Edited By Updated: 04 Feb, 2025 11:10 AM

devotee traveled 1875 km by auto rickshaw to go to mahakumbh

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें दावा किया गया है कि एक श्रद्धालु ने आंध्र प्रदेश के चित्तूर से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज तक ऑटो-रिक्शा से 1875 किलोमीटर का सफर तय किया है। यह सफर उसने महाकुंभ मेले में शामिल होने और...

नेशनल डेस्क। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें दावा किया गया है कि एक श्रद्धालु ने आंध्र प्रदेश के चित्तूर से उत्तर प्रदेश के प्रयागराज तक ऑटो-रिक्शा से 1875 किलोमीटर का सफर तय किया है। यह सफर उसने महाकुंभ मेले में शामिल होने और त्रिवेणी संगम में पवित्र स्नान करने के लिए किया।

ऑटो-रिक्शा को बनाया मिनी वैन

वायरल वीडियो को @KreatelyMedia नामक एक्स (Twitter) यूजर ने शेयर किया है। वीडियो में देखा जा सकता है कि यह ऑटो-रिक्शा किसी साधारण वाहन जैसा नहीं बल्कि एक मिनी वैन की तरह तैयार किया गया है। इसमें गद्दे और अन्य जरूरी सुविधाएं लगाई गई हैं ताकि लंबी यात्रा के दौरान आराम किया जा सके। वीडियो में तीन लोग नजर आ रहे हैं जिनमें से एक ऑटो चला रहा है और बाकी दो पीछे आराम कर रहे हैं।

 

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भक्ति और आस्था का अनोखा उदाहरण

चित्तूर के इस श्रद्धालु ने अपनी आध्यात्मिक यात्रा को पूरा करने और महाकुंभ का हिस्सा बनने के लिए यह अनोखा तरीका अपनाया। यह यात्रा कई दिनों तक चली जिसमें उन्होंने अलग-अलग इलाकों और मौसम की परिस्थितियों का सामना किया। बावजूद इसके उनकी भक्ति और समर्पण में कोई कमी नहीं आई।

लोगों को कर रहा है प्रेरित

वीडियो को लाखों लोग देख चुके हैं और कई लोगों ने इस श्रद्धालु के हौसले और दृढ़ निश्चय की सराहना की। महाकुंभ मेले में दुनिया भर से लाखों श्रद्धालु आ रहे हैं लेकिन चित्तूर के इस व्यक्ति की यात्रा अनोखी और प्रेरणादायक बन गई है। यह वीडियो बताता है कि सच्ची आस्था और समर्पण के आगे कोई भी दूरी मायने नहीं रखती।

महाकुंभ में हर कोई आस्था के रंग में रंगा

महाकुंभ मेला दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है जहां लाखों श्रद्धालु, साधु-संत और पर्यटक स्नान करने और पूजा-अर्चना करने आते हैं। इस आयोजन में शामिल होना किसी भी श्रद्धालु के लिए आध्यात्मिक रूप से बहुत खास अनुभव होता है। यही कारण है कि चित्तूर के इस व्यक्ति ने इतनी लंबी और कठिन यात्रा को भी खुशी-खुशी स्वीकार कर लिया।

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