Edited By Sahil Kumar,Updated: 22 Feb, 2026 06:38 PM

गले के सामने स्थित थायरॉयड ग्रंथि शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करती है। अगर यह ठीक से काम न करे, तो ठंड ज्यादा लगना, ध्यान न लगना, मासिक चक्र में बदलाव, बिना वजह वजन बढ़ना और त्वचा-बालों में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। खासकर महिलाओं,...
नेशनल डेस्कः आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में थकान, वजन बढ़ना या ध्यान न लगना जैसी समस्याओं को अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि ये लक्षण थायरॉयड की गड़बड़ी का संकेत भी हो सकते हैं। गले में मौजूद यह छोटी सी ग्रंथि जब असंतुलित हो जाती है, तो इसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है। ऐसे में समय रहते पहचान और जांच बेहद जरूरी है।
थायरॉयड के संकेत
बार-बार ठंड लगना
अगर मौसम सामान्य होने के बावजूद आपको लगातार ठंड लग रही है, तो यह मेटाबॉलिज्म धीमा होने का संकेत हो सकता है। थायरॉयड हार्मोन की कमी शरीर में ऊर्जा उत्पादन को कम कर देती है, जिससे ठंड का एहसास बढ़ जाता है।
ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई
भूलने की आदत बढ़ना, काम पर फोकस न कर पाना या दिमाग सुस्त महसूस होना थायरॉयड असंतुलन के संकेत हो सकते हैं। हार्मोनल कमी दिमाग की सक्रियता को प्रभावित करती है।
मासिक चक्र में बदलाव
महिलाओं में पीरियड्स का अनियमित होना, अधिक ब्लीडिंग या सामान्य से ज्यादा दर्द थायरॉयड समस्या से जुड़ा हो सकता है। हार्मोनल असंतुलन सीधे पीरियड्स साइकिल को प्रभावित करता है।
अचानक वजन बढ़ना
अगर खान-पान में बदलाव नहीं हुआ, फिर भी वजन बढ़ रहा है, तो यह धीमे मेटाबॉलिज्म का संकेत हो सकता है। थायरॉयड हार्मोन की कमी कैलोरी जलने की प्रक्रिया को धीमा कर देती है।
त्वचा और बालों में बदलाव
त्वचा का रूखा, बेजान होना और बालों का कमजोर या खुरदुरा होना भी थायरॉयड असंतुलन की चेतावनी हो सकती है।
किन लोगों को ज्यादा खतरा
क्लिवलैंड क्लिनिक की रिपोर्ट के अनुसार, महिलाएं पुरुषों की तुलना में थायरॉयड की समस्या के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं। परिवार में थायरॉयड की बीमारी का इतिहास, 60 साल से अधिक उम्र, टर्नर सिंड्रोम, सिर या गर्दन पर रेडिएशन थेरेपी, या आयोडीन युक्त दवाओं का सेवन जोखिम बढ़ा देता है।
कब करें डॉक्टर से संपर्क
यदि ये लक्षण कई हफ्तों तक बने रहें या धीरे-धीरे बढ़ रहे हों, तो TSH, T3, T4 की जांच करवाना जरूरी है। समय रहते पहचान और इलाज से थायरॉयड को नियंत्रित किया जा सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बीमारी आम है, लेकिन नजरअंदाज करने पर यह हार्ट, वजन, मानसिक स्वास्थ्य और प्रजनन क्षमता तक प्रभावित कर सकती है।