ड्राई क्लीनिंग में खराब हुआ महंगा पश्मीना शॉल और फेरन, कंपनी पर लगा 59,000 का जुर्माना, जानें पूरा मामला

Edited By Updated: 16 Oct, 2026 10:49 PM

expensive pashmina shawls and pherans damaged during dry cleaning company fined

जब कोई ग्राहक अपने महंगे कपड़े ड्राई क्लीनिंग के लिए सौंपता है, तो उसे कपड़े बेहतर हालत में वापस मिलने की उम्मीद रहती है। लेकिन अगर ड्राई क्लीनर की लापरवाही से कीमती कपड़े बर्बाद हो जाएं और शिकायत के बाद भी कोई सुनवाई न हो, तो कानून उपभोक्ता के...

श्रीनगर: जब कोई ग्राहक अपने महंगे कपड़े ड्राई क्लीनिंग के लिए सौंपता है, तो उसे कपड़े बेहतर हालत में वापस मिलने की उम्मीद रहती है। लेकिन अगर ड्राई क्लीनर की लापरवाही से कीमती कपड़े बर्बाद हो जाएं और शिकायत के बाद भी कोई सुनवाई न हो, तो कानून उपभोक्ता के अधिकारों की रक्षा करता है। जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां जिला उपभोक्ता आयोग ने महिला के पश्मीना शॉल और फेरन खराब करने पर ड्राई क्लीनिंग कंपनी पर 59,000 रुपए का जुर्माना ठोंका है।

क्या है पूरा मामला? 
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पीड़िता जमीला राशिद ने 26 मार्च 2024 को 'यूक्लीन सेलेक्ट श्रीनगर' को ड्राई क्लीनिंग के लिए पश्मीना शॉल और फेरन समेत कुल 18 कपड़े सौंपे थे। जब कपड़े वापस मिले, तो उनका कीमती पश्मीना शॉल और फेरन बुरी तरह खराब हो चुका था।

आश्वासन के बाद बंद किया फोन उठाना 
कपड़े खराब होने के बाद महिला ने तुरंत कंपनी प्रबंधन से संपर्क किया। उस समय कंपनी ने कपड़े बदलकर देने या उनकी पूरी कीमत लौटाने का भरोसा दिया। हालांकि, इसके बाद पीड़िता के बार-बार फोन करने और व्हाट्सएप पर मैसेज भेजने के बावजूद कंपनी ने कोई समाधान नहीं निकाला। कंपनी के इस रवैये से तंग आकर महिला ने न्याय के लिए उपभोक्ता आयोग का रुख किया।

व्हाट्सएप चैट बनी कंपनी के खिलाफ मुख्य सबूत 
श्रीनगर जिला उपभोक्ता आयोग ने 19 सितंबर 2026 को दिए गए अपने आदेश में कंपनी को सेवा में गंभीर कमी का दोषी पाया। सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि व्हाट्सएप पर हुई बातचीत में कंपनी ने स्वीकार किया था कि उनके कर्मचारियों की गलती से कपड़ों को नुकसान पहुंचा था और मरम्मत की कोशिश भी नाकाम रही थी।

45 दिनों के भीतर करना होगा भुगतान 
मामले की सुनवाई के बाद आयोग ने कंपनी को कुल 59,000 रुपए का भुगतान करने का सख्त आदेश दिया। इस राशि में खराब हुए कपड़ों की कीमत के 47,000 रुपए, मानसिक परेशानी के मुआवजे के तौर पर 10,000 रुपए और मुकदमों के खर्च के 2,000 रुपए शामिल हैं। आयोग ने निर्देश दिया है कि आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के 45 दिनों के भीतर कंपनी को यह राशि पीड़िता को सौंपनी होगी।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!