अजय देवगन के जुहू वाले बंगले पर BMC का बड़ा एक्शन,जानें क्या है पूरा मामला

Edited By Updated: 17 Oct, 2026 01:59 PM

major action by the bmc at ajay devgn juhu bungalow

बीएमसी के मुताबिक, बंगले में अंदरूनी बदलाव करने, विभाजन दीवारें बनाने, खिड़कियों में फेरबदल करने और अन्य संरचनात्मक कामों के लिए जरूरी अनुमति नहीं ली गई थी। नगर निगम ने इन कामों को अनधिकृत माना है।

मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन के मुंबई स्थित बंगले में निर्माण कार्य को लेकर बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) ने कार्रवाई की है। नगर निगम ने निर्माण कार्य को अनधिकृत बताते हुए उसे ढहा दिया। बीएमसी के अनुसार, बंगले के मालिक निर्माण कार्य के लिए जरूरी मंजूरी से जुड़े दस्तावेज पेश नहीं कर सके। इस मामले में अजय देवगन की ओर से दिया गया जवाब भी नगर निगम ने स्वीकार नहीं किया।

यह बंगला मुंबई के जुहू स्थित कपोल को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी में है और अजय देवगन तथा उनकी मां वीणा देवगन के नाम से जुड़ा है। करीब 7,802 वर्ग फुट क्षेत्र में बने इस बंगले में कथित तौर पर नगर निगम की अनुमति के बिना कई तरह के बदलाव और निर्माण कार्य किए जा रहे थे।

बिना अनुमति किए जा रहे थे निर्माण कार्य
बीएमसी के मुताबिक, बंगले में अंदरूनी बदलाव करने, विभाजन दीवारें बनाने, खिड़कियों में फेरबदल करने और अन्य संरचनात्मक कामों के लिए जरूरी अनुमति नहीं ली गई थी। नगर निगम ने इन कामों को अनधिकृत माना है। अधिकारियों के अनुसार, निर्माण कार्य को वैध साबित करने के लिए मालिक की ओर से कोई ऐसा दस्तावेज पेश नहीं किया गया, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि संबंधित प्राधिकरण ने इसकी मंजूरी दी थी।

10 सितंबर को जारी किया गया था नोटिस
इस मामले में बीएमसी के के/वेस्ट वार्ड कार्यालय ने 10 सितंबर को मुंबई नगर निगम अधिनियम की धारा 354A के तहत काम रोकने का नोटिस जारी किया था। नोटिस में आरोप लगाया गया था कि जुहू के विले पार्ले पश्चिम स्थित एनएस रोड नंबर 11 पर कपोल को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी के प्लॉट नंबर 10 (सीटीएस नंबर 841) में सिपोरेक्स ब्लॉक का इस्तेमाल करके बिना अनुमति निर्माण और बदलाव किए जा रहे हैं। नोटिस में बंगले के मालिक या वहां रहने वाले व्यक्ति को तत्काल निर्माण कार्य रोकने और 24 घंटे के भीतर जरूरी अनुमतियों के दस्तावेज पेश करने का निर्देश दिया गया था। साथ ही चेतावनी दी गई थी कि निर्देशों का पालन नहीं होने पर अनधिकृत निर्माण और सामग्री को हटाया जा सकता है। इस कार्रवाई का खर्च और जोखिम भी मालिक को उठाना पड़ सकता है।

6 अक्टूबर के आदेश में जवाब खारिज
बीएमसी के के/वेस्ट वार्ड कार्यालय ने 6 अक्टूबर को इस मामले में आदेश जारी किया। आदेश के अनुसार, 15 सितंबर को दिए गए जवाब के साथ निर्माण कार्य की अनुमति से जुड़े जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए थे। किसी सक्षम प्राधिकरण की मंजूरी की प्रति भी जमा नहीं की गई थी। नगर निगम ने कहा कि संबंधित निर्माण कार्य के लिए सक्षम प्राधिकरण से अनुमति लेना जरूरी था। दस्तावेजों के अभाव में मालिक की ओर से दिया गया जवाब स्वीकार नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर निर्माण कार्य को अनधिकृत करार दिया गया। बीएमसी के नोटिस में यह भी कहा गया था कि जरूरत पड़ने पर पुलिस की मदद से मौके पर काम कर रहे लोगों को हटाया जा सकता है और निर्माण स्थल पर निगरानी रखी जा सकती है। इस मामले में नगर निगम की कार्रवाई का आधार निर्माण कार्य के लिए जरूरी मंजूरी के दस्तावेजों का उपलब्ध नहीं होना है।

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