सिर्फ कंस्ट्रक्शन और ट्रैफिक नहीं...पराली-कचरा जलाना भी बना मुंबई की सांसों का दुश्मन! AQI ने तोड़े पुराने रिकॉर्ड

Edited By Updated: 25 Feb, 2026 10:31 PM

farm fires and garbage burning have become the enemy of mumbai s breathing

समंदर की नमी और खारेपन के लिए मशहूर मुंबई इस वक्त जहरीली हवा से जूझ रही है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि कई दिनों में एयर क्वालिटी इंडेक्स 350 के पार पहुंच गया, जबकि कुछ मौकों पर यह 400 के करीब दर्ज किया गया—जो शहर के लिए बेहद असामान्य माना जाता है।

नेशनल डेस्कः समंदर की नमी और खारेपन के लिए मशहूर मुंबई इस वक्त जहरीली हवा से जूझ रही है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि कई दिनों में एयर क्वालिटी इंडेक्स 350 के पार पहुंच गया, जबकि कुछ मौकों पर यह 400 के करीब दर्ज किया गया जो शहर के लिए बेहद असामान्य माना जाता है। और इसकी तुलना होने लगी है दिल्ली के प्रदूषण भरे दिनों से।

सिर्फ कंस्ट्रक्शन और ट्रैफिक नहीं, गांवों से भी आ रहा धुआं

अब तक माना जाता रहा कि अनियंत्रित निर्माण कार्य और वाहनों का धुआं ही मुख्य वजह हैं। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि शहर के आसपास के ग्रामीण इलाकों में फसल अवशेष जलाना और खुले में कचरा जलाना भी हवा को जहरीला बना रहे हैं। सर्दियों में चलने वाली पूर्वी हवाएं इन इलाकों का धुआं शहर तक पहुंचा रही हैं।

सोशल मीडिया से शुरू हुई चर्चा

इस मुद्दे पर बहस तब तेज हुई जब पायलट विषाल जोलापारा ने अपने कॉकपिट से ली गई तस्वीर साझा की। तस्वीर में शहर के आसपास खेतों में जलती आग साफ दिखाई दे रही थी। उनका पोस्ट वायरल हुआ और पहली बार बड़े स्तर पर चर्चा शुरू हुई कि क्या मुंबई की हवा पर खेतों की आग का असर पड़ रहा है।

पर्यावरण कार्यकर्ताओं की चेतावनी

आवाज फाउंडेशन की संस्थापक सुमैरा अब्दुलअली ने बताया कि मुंबई के आसपास के कई गांवों में कचरा प्रबंधन की समुचित व्यवस्था नहीं है, जिसके चलते लोग खुले में कचरा जलाते हैं। उन्होंने ठाणे और रायगढ़ के इलाकों में ऐसे कई स्थानों का दस्तावेजीकरण किया है जहां प्रदूषण का स्तर खतरनाक पाया गया। कुछ जगहों पर PM2.5 का स्तर 1000 से ऊपर तक दर्ज किया गया।

बदले मौसम ने बढ़ाई परेशानी

राष्ट्रीय उन्नत अध्ययन संस्थान, IISc कैंपस के चेयर प्रोफेसर गुफरान बेग के अनुसार इस बार समस्या की जड़ असामान्य मौसम पैटर्न भी है। आमतौर पर समुद्री हवाएं शहर की हवा को साफ रखने में मदद करती हैं, लेकिन इस बार हवा की रफ्तार कम रही है। उन्होंने इसे एल नीनो-ला नीना चक्र के संक्रमण काल से जोड़ा, जिसके कारण हवा में मौजूद प्रदूषक कण फैलने के बजाय शहर के ऊपर ही ठहर गए।

अदालत की सख्ती

जनवरी के आखिर में बॉम्बे हाई कोर्ट ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका और नवी मुंबई म्यूनिसिपल कॉरपोरेशन को फटकार लगाई। अदालत ने निर्माण स्थलों की निगरानी में कमी और प्रदूषण नियंत्रण के उपायों में ढिलाई पर नाराजगी जताई।

पहली बार चर्चा में ‘मुंबई का स्टबल बर्निंग’

दिल्ली-एनसीआर में पराली जलाने की समस्या लंबे समय से चर्चा में रही है, लेकिन मुंबई के संदर्भ में यह मुद्दा नया है। विशेषज्ञों का मानना है कि महाराष्ट्र में भी रबी सीजन के दौरान फसल अवशेष जलाने की घटनाएं होती रही हैं, पर इस बार बदले मौसम और धीमी हवाओं ने इसके असर को ज्यादा स्पष्ट कर दिया है।

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