Edited By Pardeep,Updated: 14 Feb, 2026 06:18 AM

14 फरवरी का दिन भारत के इतिहास में एक बेहद दुखद और दर्दनाक घटना के रूप में दर्ज है।
नेशलन डेस्कः 14 फरवरी का दिन भारत के इतिहास में एक बेहद दुखद और दर्दनाक घटना के रूप में दर्ज है। यह घटना भले ही सात साल पुरानी हो, लेकिन इसके जख्म आज भी देशवासियों के दिलों में ताजा हैं। 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिला में आतंकियों ने सुरक्षाबलों पर बड़ा आत्मघाती हमला किया था। इस हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी।
कैसे हुआ हमला?
उस दिन केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानी सीआरपीएफ के जवानों का काफिला जम्मू से श्रीनगर की ओर जा रहा था। जवान कई बसों में सफर कर रहे थे। इसी दौरान एक आत्मघाती हमलावर ने विस्फोटकों से भरी कार को जवानों की बस से टकरा दिया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि जोरदार धमाका हुआ और बस पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। इस हमले में कम से कम 40 जवान शहीद हो गए, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
पूरे देश में शोक और आक्रोश
हमले की खबर फैलते ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। हर राज्य में लोगों ने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी। यह हमला भारत के सुरक्षाबलों पर हुए सबसे बड़े आतंकी हमलों में से एक माना जाता है।
बाद की कार्रवाई
इस हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया। उस एक हमले ने भारत की जवाबी कार्रवाई को भी हमेशा के लिए बदल दिया था। हमले के ठीक 12 दिन बाद भारत ने पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक की थी, जैश के ठिकानों पर बम बरसाए थे। आगे चलकर इसे ही बालाकोट एयर स्ट्राइक कहा गया।
आज भी 14 फरवरी को देश शहीद जवानों को याद करता है और उनकी बहादुरी को नमन करता है। यह दिन हमें आतंकवाद के खिलाफ एकजुट रहने और देश की सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने की याद दिलाता है।