Manipur Violence पर SC सख्त! CBI को 14 दिन में रिपोर्ट सौंपने का आदेश

Edited By Updated: 13 Feb, 2026 08:15 PM

manipur violence 2023 case

मणिपुर में 2023 की जातीय हिंसा से जुड़े गंभीर मामलों पर सुनवाई करते हुए Supreme Court of India ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।

नेशनल डेस्क: मणिपुर में 2023 की जातीय हिंसा से जुड़े गंभीर मामलों पर सुनवाई करते हुए Supreme Court of India ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने Central Bureau of Investigation (CBI) को दो सप्ताह के भीतर जांच की प्रगति पर विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। यह निर्देश खास तौर पर उन 11 मामलों को लेकर है, जिनमें यौन हिंसा और सामूहिक दुष्कर्म जैसे संगीन आरोप शामिल हैं।

हाईकोर्ट करेगा निगरानी, बन सकती है विशेष पीठ

न्यायमूर्ति Surya Kant और न्यायमूर्ति Joymalya Bagchi की पीठ ने स्पष्ट किया कि इन मामलों की निगरानी मणिपुर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश करेंगे। जरूरत पड़ने पर विशेष पीठ गठित करने पर भी विचार किया जा सकता है।

अदालत ने यह भी कहा कि पीड़ितों या उनके परिवारों को आरोपपत्र की प्रतियां उपलब्ध कराई जाएं, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी रहे। साथ ही, मुफ्त और प्रभावी कानूनी सहायता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया।

सुनवाई के दौरान क्या दलीलें दी गईं?

केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta ने अदालत को बताया कि राज्य में हालात पहले से अधिक शांत हैं और आम लोग सामान्य रूप से आवाजाही कर रहे हैं। उनका कहना था कि कुछ संगठन अब भी तनाव भड़काने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए संवेदनशील मामलों की सुनवाई स्थानीय स्तर पर ही होनी चाहिए।

दूसरी ओर, पीड़ितों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता Vrinda Grover ने जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने एक महिला पीड़िता का मामला रखा, जिनका जनवरी 2026 में निधन हो गया। उनका दावा था कि यह मृत्यु सामूहिक दुष्कर्म के बाद उत्पन्न मानसिक और शारीरिक आघात से जुड़ी बीमारी के कारण हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि CBI ने पीड़िता को आरोपपत्र दाखिल होने की जानकारी तक नहीं दी और मुख्य आरोपी अदालत में पेश नहीं हो रहे, जिससे ट्रायल प्रभावित हो रहा है।

जस्टिस गीता मित्तल समिति की सिफारिशें लागू करने के निर्देश

अदालत ने केंद्र और मणिपुर सरकार को Gita Mittal की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों को लागू करने को कहा। इस समिति में Shalini Joshi और Asha Menon भी शामिल हैं। समिति ने हिंसा से प्रभावित लोगों के पुनर्वास और सहायता के लिए कई सुझाव दिए थे।

हिंसा की पृष्ठभूमि

मणिपुर में 3 मई 2023 को जातीय तनाव उस समय भड़क उठा था, जब मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की मांग के विरोध में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ निकाला गया। इसके बाद हिंसा फैल गई, जिसमें 200 से अधिक लोगों की मौत हुई, सैकड़ों घायल हुए और हजारों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा। पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने कुछ मामलों की सुनवाई राज्य से बाहर स्थानांतरित कर असम में ट्रायल कराने का आदेश दिया था।

अगली सुनवाई कब?

मामले की अगली सुनवाई 26 फरवरी 2026 को निर्धारित की गई है। अदालत के ताजा निर्देशों को मणिपुर में न्याय प्रक्रिया को मजबूत करने और पीड़ितों को राहत दिलाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

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