DRDO का ड्रोग पैराशूट टेस्ट सफल, मानव अंतरिक्ष उड़ान की तैयारी को मिली मजबूती

Edited By Updated: 19 Feb, 2026 08:26 PM

gaganyaan drogue parachute test successful

भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान को लेकर बड़ी प्रगति सामने आई है। Defence Research and Development Organisation (DRDO) ने ड्रोग पैराशूट के क्वालिफिकेशन लेवल लोड टेस्ट को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है।

नेशनल डेस्क: भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान को लेकर बड़ी प्रगति सामने आई है। Defence Research and Development Organisation (DRDO) ने ड्रोग पैराशूट के क्वालिफिकेशन लेवल लोड टेस्ट को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह परीक्षण 18 फरवरी 2026 को चंडीगढ़ स्थित Terminal Ballistics Research Laboratory (TBRL) की रेल ट्रैक रॉकेट स्लेड (RTRS) सुविधा में किया गया। इसकी जानकारी 19 फरवरी को सार्वजनिक की गई।

संयुक्त टीमों का प्रयास

इस महत्वपूर्ण परीक्षण में Vikram Sarabhai Space Centre (VSSC), Aerial Delivery Research and Development Establishment (ADRDE) और TBRL के विशेषज्ञों ने मिलकर भाग लिया। RTRS एक अत्याधुनिक हाई-स्पीड डायनामिक टेस्टिंग सुविधा है, जिसका उपयोग एयरोडायनामिक और बैलिस्टिक सिस्टम के मूल्यांकन के लिए किया जाता है।

क्या था इस टेस्ट का उद्देश्य?

इस परीक्षण में पैराशूट पर वास्तविक उड़ान के अधिकतम संभावित दबाव से भी अधिक लोड का सिमुलेशन किया गया।

  • क्वालिफिकेशन लेवल से ज्यादा लोड पर भी सिस्टम स्थिर रहा
  • डिजाइन में अतिरिक्त सुरक्षा मार्जिन की पुष्टि
  • उच्च-शक्ति रिबन पैराशूट के स्वदेशी निर्माण की क्षमता प्रमाणित

यह उपलब्धि बताती है कि भारत अब जटिल स्पेस रिकवरी सिस्टम विकसित करने में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

 गगनयान मिशन क्यों है खास?

Indian Space Research Organisation (ISRO) का गगनयान मिशन भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष अभियान है। इसके तहत तीन अंतरिक्ष यात्रियों को लगभग 400 किलोमीटर की कक्षा में तीन दिनों के लिए भेजने और फिर सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाने की योजना है।

री-एंट्री के दौरान ड्रोग पैराशूट सिस्टम की अहम भूमिका होती है। यह क्रू मॉड्यूल को स्थिर करता है और उसकी गति कम करता है, ताकि अंतिम चरण में मुख्य पैराशूट सुरक्षित तरीके से खुल सके।

बजट और आगे की राह

मानव अंतरिक्ष मिशन की तैयारियों के लिए सरकार ने हालिया बजट में अंतरिक्ष विभाग को 13,705 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। हालांकि यह परीक्षण बड़ी उपलब्धि है, लेकिन मिशन से पहले कई और क्वालिफिकेशन ट्रायल और सिस्टम वैलिडेशन प्रक्रियाएं पूरी की जानी बाकी हैं।

 आत्मनिर्भर भारत की ओर मजबूत कदम

ड्रोग पैराशूट टेस्ट की सफलता न केवल क्रू सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत की स्वदेशी अंतरिक्ष तकनीक और रक्षा अनुसंधान क्षमता को भी दर्शाती है। गगनयान मिशन की हर प्रगति देश को वैश्विक स्पेस क्लब में और मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में आगे बढ़ा रही है।

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