Edited By Anu Malhotra,Updated: 25 Mar, 2026 09:06 AM

भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देश की ऊर्जा व्यवस्था को बदलने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। 'प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम उत्पाद वितरण आदेश, 2026' को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत आए इस...
नेशनल डेस्क: भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देश की ऊर्जा व्यवस्था को बदलने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। 'प्राकृतिक गैस और पेट्रोलियम उत्पाद वितरण आदेश, 2026' को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत आए इस नए नियम का सबसे बड़ा लक्ष्य यह है कि अब गैस पाइपलाइन बिछाने के काम में कोई सरकारी अड़ंगा या देरी न हो सके।
मंजूरी का नया 'ऑटोमैटिक' सिस्टम
अक्सर देखा जाता है कि सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने में बड़ी परियोजनाएं सालों लटकी रहती हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। नए नियमों के मुताबिक, अगर किसी विभाग ने तय समय सीमा के भीतर पाइपलाइन बिछाने की अनुमति नहीं दी, तो उसे 'स्वचालित मंजूरी' (Deemed Approval) मान लिया जाएगा। यानी, अब फाइलों के रुकने से काम नहीं रुकेगा। पूरे देश के लिए एक जैसी व्यवस्था लागू होने से अलग-अलग राज्यों के चक्कर काटने की झंझट भी खत्म हो जाएगी।
अवैध वसूली और विवादों पर लगाम
जमीनी स्तर पर काम करने वाली कंपनियों को अक्सर स्थानीय निकायों या अधिकारियों की 'अतिरिक्त मांग' और अवैध वसूली का सामना करना पड़ता था। सरकार ने अब इसे पूरी तरह बंद कर दिया है। इसके अलावा, सड़क खुदाई को लेकर होने वाले झगड़ों को सुलझाने के लिए 'खोदो और सुधारो' (Dig and Restore) या 'खोदो और भुगतान करो' (Dig and Pay) जैसी स्पष्ट नीतियां बनाई गई हैं। इससे यह सुनिश्चित होगा कि पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़कें लावारिस नहीं छोड़ी जाएंगी और मरम्मत का काम समय पर होगा।
कंपनियों पर सख्ती और जनता को बड़ी राहत
जहां सरकार ने प्रक्रिया आसान की है, वहीं कंपनियों के लिए नियम भी कड़े किए हैं। काम की क्वालिटी और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बैंक गारंटी और पारदर्शी प्रक्रियाओं को अनिवार्य बनाया गया है।
इसका आपको क्या फायदा होगा?
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तेजी से मिलेगा PNG कनेक्शन: अब आपको भारी-भरकम सिलेंडर के आने का इंतज़ार नहीं करना होगा। रसोई में सीधे पाइप से गैस पहुंचेगी।
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सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा: उद्योगों को सस्ती गैस मिलेगी, जिससे उत्पादन लागत घटेगी और प्रदूषण में भी कमी आएगी।
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ऊर्जा सुरक्षा: यह कदम भारत को एक 'गैस आधारित अर्थव्यवस्था' बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।