KP Sharma Oli: नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली गिरफ्तार

Edited By Updated: 28 Mar, 2026 07:34 AM

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नेपाल में शनिवार को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया जब पूर्व प्रधानमंत्री KP शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखाक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। दोनों पर सितंबर में हुए जनरेशन Z के विरोध प्रदर्शनों को दबाने के दौरान हुई हिंसा से जुड़े गैर-इरादतन...

इंटरनेशनल डेस्क: नेपाल में शनिवार को बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया जब पूर्व प्रधानमंत्री KP शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखाक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। दोनों पर सितंबर में हुए जनरेशन Z के विरोध प्रदर्शनों को दबाने के दौरान हुई हिंसा से जुड़े गैर-इरादतन हत्या (culpable homicide) के मामले में कार्रवाई की गई है।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, ओली को भक्तपुर के गुंडु स्थित उनके निवास से हिरासत में लिया गया, जबकि लेखाक को सुबह करीब 5 बजे सूर्यविनायक इलाके से गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई गृह मंत्रालय में दर्ज औपचारिक शिकायत के बाद शुरू हुई जांच और अदालत से जारी वारंट के आधार पर की गई।

10 साल की सजा हो सकती
यह पूरा मामला उस जांच आयोग की सिफारिशों के बाद आगे बढ़ा, जिसकी अध्यक्षता पूर्व विशेष अदालत के जज गौरी बहादुर कार्की ने की थी। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में ओली, लेखाक और तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक चंद्र कुबेर खापुंग पर नेपाल के राष्ट्रीय दंड संहिता की धारा 181 और 182 के तहत आपराधिक लापरवाही का आरोप लगाने की सिफारिश की। इन धाराओं के तहत अधिकतम 10 साल की सजा हो सकती है।

रिपोर्ट में कई अन्य अधिकारियों पर भी कार्रवाई की सिफारिश की गई है, जिनमें पूर्व गृह सचिव गोकार्ण मणि दवाड़ी, सशस्त्र पुलिस बल प्रमुख राजू आर्याल, राष्ट्रीय जांच विभाग के पूर्व प्रमुख हुतराज थापा और काठमांडू के तत्कालीन मुख्य जिला अधिकारी छवि रिजाल शामिल हैं। आयोग ने कहा कि अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर भी उनके संस्थानों के नियमों के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

इसके अलावा, कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को औपचारिक फटकार देने की बात भी कही गई है, जिनमें वर्तमान पुलिस महानिरीक्षक दान बहादुर कार्की और एपीएफ अधिकारी नारायण दत्त पौडेल शामिल हैं। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की फटकार उनके भविष्य के प्रमोशन पर असर डाल सकती है।

प्रशासन की लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैये का परिणाम
आयोग की जांच में सामने आया कि युवाओं द्वारा किए गए प्रदर्शनों पर हुई हिंसक कार्रवाई प्रशासन की लापरवाही और गैर-जिम्मेदाराना रवैये का परिणाम थी। रिपोर्ट में कहा गया कि संभावित हिंसा को लेकर पहले से खुफिया चेतावनियां थीं, लेकिन उन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया। इन प्रदर्शनों में कुल 77 लोगों की मौत हुई थी और अरबों की संपत्ति का नुकसान हुआ।

गिरफ्तारियों के दौरान काठमांडू घाटी में सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी। भक्तपुर जिला पुलिस और काठमांडू घाटी पुलिस के अतिरिक्त बल तैनात किए गए। कार्रवाई से पहले गृह सचिव राज कुमार श्रेष्ठ और कानून सचिव पराश्वर धुंगाना ने पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की थी, जबकि गृह मंत्री सुधन गुरंग ने भी शुक्रवार रात सुरक्षा प्रमुखों के साथ चर्चा की।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब हाल ही में बालेन्द्र शाह ने नेपाल के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली है। 35 वर्षीय शाह, जो राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के नेता हैं, 5 मार्च को हुए चुनावों में अपनी पार्टी के सबसे बड़ी बनने के बाद संविधान के अनुच्छेद 76(1) के तहत प्रधानमंत्री बने। उन्हें राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने शीतल निवास में पद की शपथ दिलाई।

नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री और मधेशी समुदाय से आने वाले पहले नेता शाह अपनी सख्त प्रशासनिक सोच और सुधारों के एजेंडे के लिए जाने जाते हैं। उनके पद संभालने के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें बधाई दी और दोनों देशों के बीच संबंध मजबूत होने की उम्मीद जताई।

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