17 मिलियन डॉलर ड्रग तस्करी का मामलाः गुरमीत सिद्धू ने US कोर्ट में कबूला जुर्म, कनाडा से अमेरिका तक फैला साम्राज्य

Edited By Updated: 28 Mar, 2026 11:18 AM

17 million drug trafficking case gurmeet sidhu pleads guilty in us court

कनाडा के ब्रैम्पटन निवासी गुरामृत सिद्धू ने अमेरिका में अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी नेटवर्क चलाने का अपराध स्वीकार किया। उस पर सैकड़ों किलो मेथ और कोकीन की तस्करी का आरोप है। 2024 में प्रत्यर्पण के बाद अब उसे 20 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती...

International Desk: कनाडा के ब्रैम्पटन शहर के रहने वाले 62 वर्षीय गुरामृत सिद्धू ने अमेरिका की अदालत में एक बड़े ड्रग तस्करी मामले में अपना जुर्म कबूल कर लिया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, वह एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क का सरगना था, जो अमेरिका से कनाडा तक भारी मात्रा में मेथामफेटामाइन और कोकीन की तस्करी करता था। जांच एजेंसियों का कहना है कि यह नेटवर्क सीमा पार काम करता था और इसमें कई लोग शामिल थे। अमेरिका से ड्रग्स की बड़ी खेप कनाडा भेजी जाती थी, जहां इसे आगे सप्लाई किया जाता था। अधिकारियों के मुताबिक, सिद्धू इस पूरे नेटवर्क का मुख्य संचालक था और उसी के निर्देश पर यह अवैध कारोबार चल रहा था।

 

BREAKING: Extradited Canadian Drug Kingpin Guramrit Sidhu Pleads Guilty in U.S. Case Over 850 Kilos of Meth and Cocaine

U.S. authorities say Guramrit Sidhu, 62, of Brampton, Ontario, pleaded guilty to engaging in a continuing criminal enterprise after allegedly leading a… https://t.co/hjcUEIPXmb pic.twitter.com/7jAeuWuYl7

— Mocha Bezirgan 🇨🇦 (@BezirganMocha) March 26, 2026

सिद्धू को अक्टूबर 2024 में कनाडा से अमेरिका प्रत्यर्पित किया गया था। इसके बाद से वह अमेरिकी फेडरल कस्टडी में है। अब अदालत में उसने Continuing Criminal Enterprise (CCE) जैसे गंभीर आरोप में दोष स्वीकार कर लिया है, जिसे अमेरिका में बेहद गंभीर अपराध माना जाता है। इस मामले में उसे कम से कम 20 साल की जेल हो सकती है, जबकि अधिकतम सजा उम्रकैद तक हो सकती है। अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने की तारीख जुलाई 2026 तय की गई है।

 

यह सवाल भी उठ रहा है कि कनाडा ने खुद इस मामले में केस क्यों नहीं चलाया। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, इसका मुख्य कारण यह है कि अपराध का बड़ा हिस्सा अमेरिका में हुआ और वहां की एजेंसियों के पास ज्यादा मजबूत सबूत मौजूद थे। इसके अलावा, अमेरिका और कनाडा के बीच प्रत्यर्पण संधि होने के कारण आरोपी को वहां ट्रायल के लिए भेजा गया। 

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