Edited By Parveen Kumar,Updated: 27 Mar, 2026 07:14 PM

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच अहम वर्चुअल मीटिंग शुरू हो गई है। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के खतरे को देखते हुए यह बैठक बुलाई गई है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि...
नेशनल डेस्क : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के खतरे को देखते हुए सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ अहम वर्चुअल बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वैश्विक संकट के बावजूद भारत में तेल, गैस और जरूरी सामानों की सप्लाई बाधित न हो।
क्यों बुलाई गई बैठक
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर दुनिया भर के तेल बाजार और सप्लाई चेन पर पड़ रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्ग पर खतरा बना हुआ है, जिससे कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसी स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों के साथ मिलकर तैयारी मजबूत करने का फैसला किया है।
पीएम मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मिडिल ईस्ट का संकट भारत के लिए लंबी चुनौती बन सकता है। उन्होंने साफ किया कि केंद्र सरकार हर संभव कदम उठा रही है, लेकिन इन योजनाओं को जमीन पर लागू करने की जिम्मेदारी राज्यों की भी है।उन्होंने मुख्यमंत्रियों से अपील की कि वे अपने-अपने राज्यों में जरूरी वस्तुओं की सप्लाई सुचारु बनाए रखें, ताकि आम लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।
‘टीम इंडिया’ पर जोर
पीएम मोदी ने इस स्थिति की तुलना कोरोना महामारी के समय से की। उन्होंने याद दिलाया कि 2020 में कोविड-19 के दौरान केंद्र और राज्यों ने मिलकर ‘टीम इंडिया’ के रूप में काम किया था। उन्होंने कहा कि उसी तरह आज भी सभी को मिलकर काम करने की जरूरत है, ताकि देश इस संकट का सामना मजबूती से कर सके।
कोरोना काल का जिक्र
प्रधानमंत्री ने बताया कि कोरोना के दौरान केंद्र और राज्यों के बीच लगातार समन्वय बना रहा। लॉकडाउन से लेकर टेस्टिंग, इलाज और वैक्सीनेशन तक हर स्तर पर मिलकर काम किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय राज्यों ने राजनीति से ऊपर उठकर सहयोग किया, जिससे देश बड़ी चुनौती से बाहर निकल सका।